रूढ़िवाद (Conservatism):
रूढ़िवाद को अनुदारवाद अथवा दक्षिणपंथवाद भी कहा जाता है क्योंकि दक्षिणपंथी इसे उदारवादियों और समाजवादियों से भिन्न बनाते हैं । अनुदारवाद एक ऐसी विचारधारा है जो पारंपरिक मान्यताओं जैसे धर्म,संस्कृति, राष्ट्रवाद आदि का अनुकरण तार्किकता या वैज्ञानिकता के स्थान पर केवल आस्था के आधार पर करती है । यह विचारधारा प्राचीन काल से प्रचलित मान्यताओं और व्यवस्था के प्रति सम्मान को बढ़ावा देती है , यह विचारधारा नए विचारों को आजमाने के बजाय पुरानी और आजमाएं हुए विचारों और संस्थाओं को कायम रखने का समर्थन करती है ।
🔹 शास्त्रीय अनुदारवाद परिवर्तन का विरोध तो सीधा नहीं करता परंतु क्रांतिकारी परिवर्तन का विरोध करता है ।
🔹 अनुदारवाद की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द conservare से हुई जिसका अर्थ होता है रक्षा करना तथा सुरक्षित रखना ।
🔹 अनुदारवादी विचारधारा का जनक एडमंड बर्क को माना जाता है ।
रूढ़िवादी विचारधारा का इतिहास
रूढ़िवादी विचारों को अरस्तु के विचारों में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने परंपराओं को अत्यधिक महत्व दिया था और पुरुष और महिलाओं के बीच विषमता को स्वाभाविक कहा था । फ्रांसीसी क्रांति (1789) के बाद फ्रांस में इस विचारधारा का विकास हुआ , यह विचारधारा व्यक्तिगत संपत्ति आत्मनिर्भरता तथा व्यक्तिवाद का समर्थन करती है ।
अनुदारवाद पर एडमंड बर्क के विचार :
एडमंड बर्क ने अपनी रचना ' Reflections on the french revolution ( 1790) में फ्रांसीसी क्रांति की आलोचना की । उनके अनुसार राज्य कोई चाय यह काफी की मशीन नहीं है जिसे इच्छा अनुसार बदल दिया जाए बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के बीच समझौता है , यह विज्ञानों में विज्ञान है कलाओं में कला है ।
एडमंड वर्क के अनुसार व्यक्ति यह समझने में असमर्थ है कि उत्तराधिकार में मिली बहुत सी चीजे व्यक्ति के सोचने एवं समझने की क्रिया को प्रभावित करती हैं इसलिए समाज का वस्तुनिष्ठ रूप से मूल्यांकन करने का प्रयास व्यर्थ है।
19वीं सदी में इंग्लैंड में पारंपरिक भू स्वामियों तथा उद्योग पतियों ने टोरी पार्टी का गठन किया जिसे अनुदारवादी पार्टी भी कहा जाता है, क्योंकि इन्होंने अनुदारवाद का समर्थन किया ।
रूढ़िवादी विचारधारा :
🔹 रूढ़िवाद ,समाज में उपस्थित परंपराओं प्रथाओं एवं संस्थाओ पर विश्वास रखते हैं , उनके अनुसार जिस प्रकार ईश्वर द्वारा प्राकृतिक नियमों के आधार पर विश्व का निर्माण किया गया है उसी प्रकार मानवीय समाज का भी निर्माण किया गया है । परंपरावादी बुद्धि और विवेक के विरोधी नहीं है बल्कि परंपराओं को भी सदियों के विवेक के रूप में चित्रित करते हैं , उनके अनुसार व्यक्ति विवेकशील है परंतु परंपराओं को भी अस्वीकार नहीं किया जा सकता, इसलिए परंपरावादी उदारवादियों से अलग है ।
🔹 रूढ़िवादी विचारधारा के अनुसार मानव नैतिक रूप से अपूर्ण है अतः रूढ़िवादियों ने हॉब्स की भांति मानव के अपूर्ण स्वरूप को स्वीकार किया है ,इसलिए ब्रिटेन के राजनीतिक शास्त्री माइकल ओकशॉट ने परंपरा ,अनुभव और इतिहास को अत्यधिक महत्व दिया है ।
🔹 इनके अनुसार समाज एक मानवीय शरीर की भांति कार्यकर्ता है जिसका अपना दिमाग ,शरीर और हृदय भी होता है परंतु शरीर के यह अंग तभी महत्वपूर्ण है जब समूचे शरीर के भाग के रूप में कार्य करते हैं अतः समाज को यंत्र की भांति नहीं समझा जा सकता जैसा की उदारवादी मानते हैं ।
🔹 रूढ़िवाद ,संपत्ति के अधिकारों के समर्थक हैं इसलिए समाज को महत्व देने के कारण भी यह समाजवादियों से अलग है । उनके अनुसार संपत्ति से व्यक्ति को सुरक्षा प्राप्त होती है तथा समाज में उसे सम्मान भी प्राप्त होता है और संपत्ति व्यक्ति के व्यक्तित्व का ही विस्तार है ।
रूढ़िवाद के प्रकार :
(i) सत्तावादी रूढ़िवाद -
फ्रांसीसी क्रांति के दौरान अधिनायक वादी शासन के प्रबल समर्थक जोसेफ डे मेस्ट्रे थे , जिन्होंने राजतंत्र व्यवस्था का समर्थन किया । इनके अनुसार समाज दो विचारों से संचालित है पहले सिंहासन और दूसरा परिवर्तन । रूस के जार निकोलस II ने भी राजतंत्र और राष्ट्रवाद का समर्थन किया तथा 1839 में लुइस नेपोलियन ने भी शासन पर अधिनायक वादी नियंत्रण कर लिया।
(ii) पितृसत्तात्मक रूढ़िवाद : पितृसत्तात्मक रूढ़िवाद से अभिप्राय है कि शासक का नियंत्रण समाज पर ,जिस प्रकार से पिता का नियंत्रण परिवार पर होता है ।इसके दो भाग हैं ।
🔹 एक राष्ट्र रूढ़वाद - इस विचारधारा का प्रयोग सर्वप्रथम ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बेंजामिन दिजरायली ने 19वीं सदी में किया था । उनके अनुसार राष्ट्र को दो भागों में बंटने से बचाने के लिए सरकार को ऐसी नीतियां बनाना चाहिए जिससे सभी वर्गों का कल्याण हो सके । रूढ़िवाद की यही विचारधारा को लार्ड रुडोल्फ चर्चिल ने टोरी लोकतंत्र के रूप में प्रदर्शित किया । हेराल्ड मैकमिलन ने अपनी रचना The middle way (1938) में पूंजीवादी व्यवस्था को नियंत्रित करने पर बल दिया ।
🔹 ईसाई लोकतंत्र - ईसाई धर्म की प्रसिद्ध मान्यता कैथोलिक को लोकतंत्र के साथ मिलने का प्रयास किया गया जिसे इसाई लोकतंत्र कहा जाता है । जर्मनी में क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी का निर्माण किया गया तथा इटली में भी इस दल का गठन किया गया । इसके अनुसार चर्च द्वारा व्यवसायिक समूह को साथ लेकर सामाजिक सहभागिता का नारा दिया गया । इन्होंने लोकतंत्र से व्यक्ति के स्वतंत्रता का संरक्षण किया और ईसाई धर्म से सामाजिक दायित्वों को स्वीकार किया।
(iii) तंत्रवादी रूढ़िवाद - इसे स्वेच्छातंत्र या दक्षिणपंथवाद भी कहा जाता है। तंत्रवादी रूढ़िवाद सामाजिक रूप में संस्कृति और राष्ट्रवाद के संरक्षक हैं,जबकि आर्थिक रूप में बाजारवादी व्यवस्था का भी समर्थन करते हैं । यद्यपि नव दक्षिणपंथवादी विचारों में अनेक प्रकार के मतभेद विद्यमान है इसलिए सर रोजर स्क्रुटन ने कहा कि दक्षिणपंथवाद में मुक्त बाजार के लिए कोई स्थान नहीं है ,जबकि नाजुक और फ्रीडमैन जैसे दक्षिणपंथवादी बाजारवादी व्यवस्था के पूर्ण समर्थक है ।
एक राष्ट्र अनुदारवाद का प्रवर्तक बेंजामिन डीजरायली को माना जाता है । यूरोप में अनुदारवाद का समर्थन मुख्तया कैथोलिक दलों द्वारा किया जाता है । यह वर्ग बाजार आधारित व्यवस्था का समर्थन करता है । अमेरिका में इस विचारधारा का समर्थन रिपब्लिकन पार्टी के द्वारा किया जाता है जिनके समर्थकों में रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है ।
रूढ़िवाद पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. रूढ़िवाद क्या है?
उत्तर:
रूढ़िवाद एक राजनीतिक विचारधारा है जो परंपराओं, स्थिरता और क्रमिक परिवर्तन में विश्वास रखती है। यह मानती है कि समाज में परिवर्तन होना चाहिए, लेकिन धीरे-धीरे और परंपराओं के अनुरूप।
प्रश्न 2. रूढ़िवाद के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?
उत्तर:
1. परंपराओं का सम्मान
2. सामाजिक स्थिरता
3. परिवर्तन में क्रमिकता
4. धर्म और नैतिक मूल्यों पर बल
5. राज्य की सीमित भूमिका
प्रश्न 3. रूढ़िवाद का जनक (Father of Conservatism) किसे कहा जाता है?
उत्तर:
एडमंड बर्क (Edmund Burke) को आधुनिक रूढ़िवाद का जनक कहा जाता है।
प्रश्न 4. एडमंड बर्क ने फ्रांसीसी क्रांति की आलोचना क्यों की?
उत्तर:
बर्क ने कहा कि फ्रांसीसी क्रांति ने परंपराओं और सामाजिक संस्थाओं को नष्ट कर दिया। उन्होंने माना कि समाज को तर्क नहीं बल्कि अनुभव और परंपरा के आधार पर चलना चाहिए।
प्रश्न 5. “एक राष्ट्र रूढ़िवाद” (One Nation Conservatism) का प्रवर्तक कौन था?
उत्तर:
बेंजामिन डिज़रेली (Benjamin Disraeli) — उन्होंने अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करने पर बल दिया।
प्रश्न 6. रूढ़िवाद उदारवाद से कैसे भिन्न है?
उत्तर:
उदारवाद व्यक्ति की स्वतंत्रता पर ज़ोर देता है।
रूढ़िवाद समाज की स्थिरता और परंपराओं की रक्षा पर ज़ोर देता है।
प्रश्न 7. आधुनिक रूढ़िवाद (Neo-Conservatism) क्या है?
उत्तर:
आधुनिक रूढ़िवाद 20वीं सदी में उभरा एक रूप है जो मुक्त बाज़ार अर्थव्यवस्था, मजबूत राष्ट्र-राज्य और पारंपरिक नैतिक मूल्यों का समर्थन करता है।
प्रश्न 8. रूढ़िवाद किसके विरोध में उभरा था?
उत्तर:
यह फ्रांसीसी क्रांति (1789) और उदारवाद के अत्यधिक तर्कवाद व समानतावाद के विरोध में उभरा।
प्रश्न 9. रूढ़िवाद में “परिवर्तन” की दृष्टि क्या है?
उत्तर:
रूढ़िवाद परिवर्तन को अस्वीकार नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे और परंपराओं के अनुरूप परिवर्तन को स्वीकार करता है।
प्रश्न 10. बर्क के अनुसार समाज क्या है?
उत्तर:
बर्क ने समाज को “जीवित, मृत और आने वाली पीढ़ियों के बीच की साझेदारी (partnership)” कहा — अर्थात परंपरा और अनुभव का निरंतर प्रवाह।
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