उदारवाद क्या है ? परिभाषा, इतिहास । उदारवाद के प्रकार (शास्त्रीय उदारवाद, सकारत्मक उदारवाद,नव-उदारवाद)।( Liberalism in Hindi)
🔹 उदारवाद क्या है? (Liberalism meaning in hindi)
🔹उदारवाद की परिभाषाएं ।
🔹उदारवाद का इतिहास
🔹उदारवाद के प्रकार
शास्त्रीय उदारवाद (Classical Liberalism)
सकारात्मक उदारवाद (कल्याणकारी राज्य)
नव उदारवाद (स्वेच्छांतरवाद)
🔹उदारवाद (Liberalism) – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ।
उदारवाद (Liberalism) क्या है?
उदारवाद (Liberalism) एक ऐसी विचारधारा है जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों को राज्य तथा समाज से ऊपर रखा जाता है । इसका मुख्य उद्देश्य समाज और राज्य को सीमित शक्ति प्रदान करते हुए व्यक्ति को अधिकतम स्वतंत्रता प्रदान करना है।
उदारवाद की परिभाषाएं
1. हैकर के अनुसार " उदारवाद राजनीति के शब्दकोश में एक प्रचलित शब्दावली है ,परंतु एक साहसी व्यक्ति ही इसकी परिभाषा देने का प्रयास करेगा। उदारवाद व्यक्ति और राज्य के संबंध में एक दृष्टिकोण है ।"
2. जॉन लॉक के अनुसार
“राज्य की शक्ति सीमित होनी चाहिए” और व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों की रक्षा राज्य का प्रमुख कर्तव्य है।
🔹 जॉन लॉक को उदारवाद का जनक कहा जाता है।
3. जे. एस. मिल (J. S. Mill) के अनुसार
“उदारवाद वह विचारधारा है जो व्यक्ति की स्वतंत्रता को समाज और राज्य के नियंत्रण से सुरक्षित रखती है।”
4. टी. एच. ग्रीन (T. H. Green) के अनुसार
“उदारवाद का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करना है जिनमें व्यक्ति अपनी पूर्ण क्षमता का विकास कर सके।”
5. लास्की के अनुसार " उदारवाद सिद्धांतों का समुच्चय नहीं बल्कि मन की एक आदत है । "
6. रिचर्ड बैंहम के अनुसार " व्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास ही उदारवाद है ।"
उदारवाद का इतिहास :
🔹उदारवाद का उदय मध्यम वर्ग की विचारधारा के रूप में हुआ । इसका उदय वणिकवाद के विरोध में हुआ , इसके उदय के प्रमुख कारण पुनर्जागरण आंदोलन, धर्म सुधार आंदोलन ,वाणिज्यिक क्रांति, संचार साधनों का विकास एवं औद्योगिक क्रांति हैं।
🔹 उदारवाद का विकास मूलतः इंग्लैंड व यूरोप में हुआ ।
🔹थॉमस हॉब्स,जॉन लॉक तथा मोंतेस्क्यू जैसे दार्शनिकों ने उदारवाद जैसे विचारधारा को जन्म दिया । परंतु हॉब्स को पूर्ण उदारवादी नहीं माना जाता क्योंकि हॉब्स ने पूर्ण सत्तावादी राज्य का समर्थन किया था ।
🔹जॉन लॉक ने पूर्ण सत्तावादी राज्य का खंडन करते हुए सीमित और संवैधानिक शासन का समर्थन किया ,इन्हें उदारवाद का जनक कहा जाता है।
🔹उदारवाद की विचारधारा में समय के साथ विचारकों ने अपने मत प्रस्तुत किए एवं धीरे धीरे इसमें बदलाव हुए ।
उदारवाद के प्रकार :
उदारवाद के विभिन्न प्रकारों में मुख्य अंतर व्यक्तियों की स्वतंत्रता, राज्य की भूमिका और शक्तियां तथा सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण के आधार पर है।
शास्त्रीय उदारवाद (Classical Liberalism) :
शास्त्रीय उदारवाद उदारवादी विचारधारा का सबसे प्रारंभिक और मूल रूप है। यह मुख्य रूप से व्यक्ति की स्वतंत्रता, सरकार का व्यक्तियों पर सीमित हस्तक्षेप, संपत्ति रखने व बेचने की स्वतंत्रता देता है और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था पर बल देता है। यह विचार 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच यूरोप में विकसित हुआ, इस विचारधारा के मुख्य विचारक जॉन लॉक , एडम स्मिथ और जे. एस. मिल हैं।
🔹 शास्त्रीय उदारवाद व्यक्ति व राज्य के संबंध में व्यक्ति को ज्यादा महत्व देता है। इसके अनुसार समाज व राज्य एक कृत्रिम संस्था है,जिसका निर्माण व्यक्तियों ने अपने हितों के लिए किया है ।
🔹इस उदारवाद के अनुसार राज्य का हस्तक्षेप आर्थिक गतिविधियों में नहीं होना चाहिए ।आर्थिक गतिविधियों का नियंत्रण बाजार के आधार पर होगा ।एडम स्मिथ के अनुसार सभी व्यक्तियों को खुला छोड़ देने से समाज का विकास खुद ही हो जाएगा ।एडम स्मिथ की प्रसिद्ध रचना ' The wealth of Nation (1776) है।
🔹 बेन्थम ने उदारवाद को उपयोगितावाद के माध्यम से आगे बढ़ाया,उनके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का मूल उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा सुख अर्जित करना है इसलिए व्यक्तियों को अधिक सुख प्रदान करने वाली शासन प्रणाली ही बेहतर है ।
🔹 शास्त्रीय उदारवाद ने लोकतंत्र को साधन तथा व्यक्ति को साध्य माना है ,उनके अनुसार लोकतंत्र का प्रयोग व्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है ।
🔹शास्त्रीय उदारवाद के अनुसार सभी व्यक्ति नैतिक रूप से सामान हैं।
🔹आलोचना : इसमें व्यक्ति व समाज के संबंध का वर्णन सही नहीं है, इसलिए मैकफर्सन ने इसे स्वत्वमूलक व्यक्तिवाद कहा। शास्त्रीय उदारवाद में व्यक्ति को खुला छोड़ देने से समाज के विकास वाली बात आंशिक एवं त्रुटिपूर्ण है,क्योंकि समाज में सबकी स्थिति सामान नहीं है ।
सकारात्मक उदारवाद (कल्याणकारी राज्य):
शास्त्रीय उदारवाद में जे एस मिल , स्पेंसर, टी एच ग्रीन, एल टी हॉब हाउस ने कुछ संशोधन किए जिसे सकारात्मक या संशोधनात्मक उदारवाद कहा जाता है । जे एस मिल और ग्रीन ने शास्त्रीय उदारवाद को कल्याणकारी राज्य के रूप में परिवर्तित कर दिया ।
🔹 जे एस मिल पहले उदारवादी विचारक हैं जिन्होंने व्यक्ति व राज्य के मध्य समाज नामक तीसरे तत्त्व की खोज की ।मिल ने अपनी पुस्तक ' Principles of Polotical economy ' (1848) में राज्य का आर्थिक गतिविधियों में हस्तक्षेप को आवश्यक माना । क्योंकि समाज में सभी की स्थिति सामान नहीं होती । अतः राज्य के द्वारा लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा एवं जीवन की मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। राज्य का कार्य केवल सुरक्षा करना , विधि को बनाए रखना मात्र नहीं है ।
🔹सेबाइन के अनुसार , टी एच ग्रीन ने उदारवाद का सबसे सफल संशोधन किया, उन्होंने राज्य व व्यक्ति के मध्य विरोधाभासों को दूर किया तथा सामान्य भलाई की संकल्पना को महत्वपूर्ण बना दिया । इन्होंने व्यक्ति को सामाजिक प्राणी माना तथा परंपरागत अणुवादी संकल्पना को गलत माना । इन्होंने राज्य को एक आवश्यक अच्छाई माना ,इनके अनुसार राज्य व्यक्ति के नैतिक जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है ।इसलिए वेपर ने कहा ग्रीन ने आदर्शवाद को सभ्य एवं उदारवाद को सामाजिक बनाया । सकारत्मक उदारवाद को सामाजिक उदारवाद भी कहा जाता है।
🔹 लास्की ने उदारवाद के राजनीति स्वरूप तथा समाजवाद के आर्थिक स्वरूप को मिलाने का प्रयास किया एवं कल्याणकारी उदारवाद के पक्ष में तर्क दिया । उन्होंने व्यक्ति के आर्थिक अधिकारों पर बल दिया ।
🔹 सकारात्मक उदारवाद के आर्थिक आधार का निर्माण जॉन मेनार्ड कींस और ग्रेलबाथ ने किया । जॉन मेनार्ड कींस ने अपनी रचना ' The general theory of Employment,Interest and money '(1936) में कहा की राज्य के सक्रिय हस्तक्षेप से अर्थव्यवस्था को आर्थिक मंदी का शिकार होने से बचाया जा सकता है ।
🔹 सेबाइन के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात उदारवाद एवं लोकतंत्र को एक दूसरे के पर्यायवाची के रूप में देखा जाने लगा अतः लोकतंत्र को कल्याणकारी राज्य के रूप में व्यक्त किया गया।
🔹 सकारात्मक उदारवादी विचारकों में जॉन रॉल्स और डार्किन ने कल्याणकारी राज्य की संकल्पना का समर्थन किया ।
🔹 आलोचना: एफ ए हेयक ने अपनी रचना 'The Road of Serfdom' (1944) में समाजवाद को दासता का मार्ग बताया , इन्होंने कल्याणकारी राज्य व राज्य द्वारा नियंत्रित अर्थव्यवस्था की कड़ी आलोचना की । इनके अनुसार कल्याणकारी राज्य की भूमिका द्वारा व्यक्ति के जीवन पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण हो गया जिससे व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं स्वायतता में कमी आई ।
1979 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर ने कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना का त्याग करते हुए आर्थिक उदारवाद को अपनाया जिसे नव उदारवाद कहा गया ।
नव उदारवाद (स्वेच्छातंत्रवाद) :
नव उदारवाद को नव दक्षिणपंथ भी कहा जाता है। यह आधुनिक युग की एक आर्थिक और राजनीतिक विचारधारा है , जो राज्य के हस्तक्षेप को कम करके ,निजीकरण व बाजार की स्वतंत्रता बढ़ाने पर जोर देती है ।यह विचारधारा 1970 के दशक में उभरी ।
🔹 एफ ए हेयक ने संवैधानिक स्वतंत्रता में नव उदारवाद की विचारधारा का आधार रखा।जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता व समानता को परस्पर विरोधी सिद्धांत माना । इन्होंने व्यक्तिवादी , अणुवादी, बाजारवादी अर्थव्यवस्था को पुनः जीवित किया । इन्होंने कल्याणकारी राज्य को विधि के शासन व कुशलता के विरुद्ध बताया क्योंकि व्यक्तियों के मध्य अतार्किक भेदभाव किया जाता है । कल्याणकारी राज्य का लाभ गरीबों को नहीं अपितु मध्यम वर्ग को प्राप्त होता है। हेयक ने राज्य के कल्याणकारी कार्यों का पूर्णतः विरोध नहीं किया बल्कि उस संकल्पना का विरोध किया जिसका प्रयोग ब्रिटेन में हुआ । एफ ए हेडक को नव उदारवाद का जनक माना जाता है।
🔹नव उदारवाद की मान्यता को फ्रीडमैन ने आगे बढ़ाया ,इनके अनुसार पूंजीवादी व्यवस्था व स्वतंत्रता में संबंध पाया जाता है । स्वतंत्रता वही संभव है जहां पूंजीवादी प्रणाली हो ।
🔹नवउदारवादी विचारकों ने नाजिक ने राज्य के न्यूनतम कार्यों का समर्थन किया ।उनके अनुसार व्यक्ति अपनी क्षमता व प्रतिभा का स्वामी है,अतः उसके द्वारा अर्जित वस्तुओं पर उसी का स्वामित्व है ।इन इन्होंने अणुवादी समाज को स्वीकार करते हुए कहा कि समाज का अस्तित्व व्यक्तियों से ही है। इनके अनुसार राज्य का कार्य केवल पुलिस व सुरक्षा के लिए होना चाहिए। इसलिए न्यूनतम कर का समर्थन किया ।
➡️ उदारवाद के जनक जॉन लॉक को कहा जाता है।
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उदारवाद (Liberalism) – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
1. उदारवाद क्या है?
उत्तर:
उदारवाद एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा है जो व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, विधि का शासन (Rule of Law) और सीमित सरकार पर बल देती है। इसका मूल सिद्धांत है कि व्यक्ति समाज और राज्य से पहले आता है।
2. उदारवाद के मुख्य सिद्धांत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
व्यक्ति की स्वतंत्रता (Individual Liberty)
विधि का शासन (Rule of Law)
समानता (Equality before Law)
सीमित सरकार (Limited Government)
सहिष्णुता (Tolerance)
लोकतंत्र और मानवाधिकारों का समर्थन
3. उदारवाद के प्रमुख विचारक कौन हैं?
उत्तर:
जॉन लॉक (John Locke) – प्राकृतिक अधिकार और सीमित सरकार
एडम स्मिथ (Adam Smith) – आर्थिक उदारवाद (Laissez-faire)
जेरेमी बेंथम (Jeremy Bentham) – उपयोगितावाद (Utilitarianism)
जॉन स्टुअर्ट मिल (J.S. Mill) – स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वायत्तता
टी.एच. ग्रीन (T.H. Green) – नया उदारवाद (New Liberalism)
4. शास्त्रीय उदारवाद (Classical Liberalism) और नया उदारवाद (Modern/New Liberalism) में क्या अंतर है?
उत्तर:
शास्त्रीय उदारवाद :
काल - 17वीं–19वीं सदी
सरकार की भूमिका- न्यूनतम हस्तक्षेप (Laissez-faire)
मुख्य विचार - आर्थिक स्वतंत्रता
प्रमुख विचारक - लॉक, स्मिथ, मिल
नया उदारवाद :
काल - 19वीं–20वीं सदी
सरकार की भूमिका-कल्याणकारी भूमिका
मुख्य विचार -सामाजिक न्याय
प्रमुख विचारक - टी.एच. ग्रीन, हॉब्सहाउस
5. उदारवाद में “व्यक्तिवाद” (Individualism) का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यक्तिवाद का अर्थ है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकार सर्वोपरि हैं। समाज और राज्य का निर्माण व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हेतु किया गया है, न कि उसे सीमित करने के लिए।
6. उदारवाद के आलोचक कौन हैं और उनकी आलोचनाएँ क्या हैं?
उत्तर:
मार्क्सवादी आलोचना: उदारवाद केवल पूँजीपतियों के हितों की रक्षा करता है।
सामुदायिकतावादी आलोचना: यह व्यक्ति को समाज से अलग मानता है।
नारीवादी आलोचना: यह पुरुष-केंद्रित स्वतंत्रता की अवधारणा प्रस्तुत करता है।
7. उदारवाद और लोकतंत्र का संबंध क्या है?
उत्तर:
उदारवाद ने लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे स्वतंत्रता, समानता, विधि का शासन, और अधिकारों की सुरक्षा को वैचारिक आधार प्रदान किया है। आधुनिक लोकतंत्र, उदारवाद का ही व्यावहारिक रूप है।
8. आर्थिक उदारवाद (Economic Liberalism) किसने प्रतिपादित किया?
उत्तर:
एडम स्मिथ ने “The Wealth of Nations” (1776) में आर्थिक उदारवाद का प्रतिपादन किया, जिसमें उन्होंने मुक्त बाज़ार (Free Market) और Laissez-faire नीति का समर्थन किया।
9. जॉन स्टुअर्ट मिल की ‘On Liberty’ का मुख्य विचार क्या है?
उत्तर:
इस पुस्तक में मिल ने कहा कि व्यक्ति की स्वतंत्रता तब तक सीमित नहीं की जानी चाहिए जब तक वह दूसरों को नुकसान नहीं पहुँचाता। इसे Harm Principle कहा जाता है।
10. नया उदारवाद (New Liberalism) किन समस्याओं के समाधान के रूप में उभरा?
उत्तर:
औद्योगिक क्रांति के बाद उत्पन्न गरीबी, असमानता, और श्रमिक शोषण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए नया उदारवाद सामने आया, जिसने राज्य को कल्याणकारी भूमिका निभाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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