नागरिकता क्या है? नागरिकता की परिभाषा, भारतीय नागरिकता के नियम (अनुच्छेद 5-11), Citizenship Act 1955, नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA 2019, नागरिकता प्राप्ति, समाप्ति व अधिकार हिंदी में पढ़ें।
(Citizenship in Hindi)
🔹नागरिकता क्या है ? नागरिकता की परिभाषा ।
(Citizenship in Hindi)
🔹भारतीय नागरिकता क्या है?भारतीय नागरिकता के नियम (अनुच्छेद 5 से 11)
🔹नागरिकता अधिनियम 1955 (Citizenship Act, 1955) क्या है?
भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त करें ?
नागरिकता समाप्त होने के आधार (धारा 8-10)
🔹नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019
🔹 अधिकार एवं नागरिकता ।
नागरिकता क्या है ? नागरिकता की परिभाषा :
(Citizenship in Hindi)
नागरिकता किसी देश के कानून द्वारा दिया गया वह कानूनी दर्जा है, जिसके आधार पर व्यक्ति को राज्य के प्रति अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं। नागरिकता के द्वारा ही
व्यक्ति को मतदान करने , चुनाव लड़ने ,संवैधानिक पदों पर नियुक्त होने ,तथा मौलिक अधिकारों का पूर्ण लाभ लेने जैसे अधिकार प्राप्त होते हैं ।
नागरिकता का विचार यूनानी युग में , अरस्तू द्वारा प्रतिपादित किया गया । जिसमें सभी नागरिकों को शासन सत्ता में पूर्ण भागीदारी का अधिकार दिया गया । यद्यपि अरस्तू के विचार में नागरिकता केवल मालिक के लिए उपलब्ध थी ।
आधुनिक युग में नागरिकता का विचार कानूनी रूप में परिवर्तित हो गया तथा नागरिकों को कुछ मूलभूत अधिकार दिए गए जो विदेशियों को प्राप्त नहीं है ।
भारतीय नागरिकता क्या है?भारतीय नागरिकता के नियम (अनुच्छेद 5 से 11) :
भारतीय संविधान के भाग -2 में अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता का प्रावधान है। सभी अनुच्छेदो का विस्तृत वर्णन निम्नवत है ।
अनुच्छेद 5 – भारत के प्रारंभिक नागरिक (Citizenship at the commencement of the Constitution)
संविधान लागू होने की तिथि (26 जनवरी 1950) पर नागरिकता निर्धारित की गई थी। इस अनुच्छेद के अनुसार जो व्यक्ति भारत में जन्म लिया हो या उसके माता पिता का जन्म भारत में हुआ हो , या संविधान लागू होने से पहले भारत में निवास कर रहे है ,वे सभी भारत के नागरिक माने जाएंगे।
अनुच्छेद 6 – पाकिस्तान से आए प्रवासी (Partition Refugees)
जो लोग पाकिस्तान से भारत आए थे, उन्हें कुछ शर्तों पर भारत की नागरिकता दी गई।
यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता/पूर्वज भारत में जन्मे थे और वे विभाजन के बाद भारत आए, तो वे कुछ शर्तों (जैसे — 19 जुलाई 1948 से पहले या बाद में आने पर पंजीकरण की प्रक्रिया) के अनुसार भारतीय नागरिक बन सकते हैं।
अनुच्छेद 7 – पाकिस्तान गए हुए लोगों के लिए प्रावधान (माइग्रेंट्स टू पाकिस्तान)
जो लोग विभाजन के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए, उन्हें भारतीय नागरिकता से वंचित किया गया।
हालांकि, यदि वे बाद में वापस भारत आकर बस गए और पंजीकरण कराया, तो वे नागरिक बन सकते थे।
अनुच्छेद 8 – विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता
जो व्यक्ति भारत के बाहर रहते हैं, लेकिन उनके माता-पिता या पूर्वज भारत में जन्मे थे। वे भारतीय राजनयिक/कांसुलेट में अपना नाम दर्ज करा कर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
अनुच्छेद 9 – दोहरी नागरिकता का निषेध
यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाएगी।
भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है।
अनुच्छेद 10 – नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता
संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन रहते हुए नागरिकता से संबंधित अधिकारों की निरंतरता बनी रहेगी।
जब तक संसद कोई कानून नहीं बनाती ।
अनुच्छेद 11 – संसद की नागरिकता पर शक्ति
संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह नागरिकता से संबंधित सभी मामलों (अर्जन, समाप्ति, पुनः प्राप्ति आदि) पर कानून बना सकती है।
इसी शक्ति के तहत संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया।
नागरिकता अधिनियम 1955 क्या है? (Citizenship Act, 1955) :
यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद द्वारा बनाया गया था। इसका उद्देश्य भारत में नागरिकता प्राप्त करने, समाप्त करने और उससे जुड़े अन्य मामलों को नियंत्रित करना था । यह 30 दिसंबर 1955 से लागू किया गया ।
भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त करें ?
भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पाँच प्रमुख तरीके:
1. जन्म से (By Birth)( धारा- 3): 26 जनवरी 1950 से लेकर आज तक भारत में जन्म लेने वाले कुछ व्यक्ति नागरिक माने जाते हैं। समय के अनुसार कुछ बदलाव हुए हैं:
(i) 1950–1987: भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति नागरिक था।
(ii) 1987–2004: कम से कम एक माता या पिता भारतीय नागरिक होना चाहिए। (संशोधन 1986 )
(iii) 2004 के बाद: माता या पिता में से एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी (illegal migrant) न हो। (संशोधन 2003 )
2. वंशानुक्रम से (By Descent)(धारा-4): यदि कोई व्यक्ति भारत के बाहर जन्मा है, और उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक है, तो वह भी भारतीय नागरिक हो सकता है (कुछ शर्तों सहित)।
3.पंजीकरण से (By Registration)(धारा -5):
कुछ वर्गों के लोग भारत सरकार से आवेदन कर के नागरिक बन सकते हैं, जैसे:
(i)भारतीय मूल के लोग जो भारत में रह रहे हों,
(ii)भारतीय नागरिक से विवाहित विदेशी व्यक्ति,
(iii)भारत में लंबे समय से बसे विदेशी व्यक्ति।
4.प्राकृतिककरण से (By Naturalization) (धारा -6):
कोई विदेशी व्यक्ति भारत में निर्धारित अवधि तक (सामान्यतः 11 वर्ष) निवास करने के बाद आवेदन करके नागरिकता प्राप्त कर सकता है। ( CAA, 2019 के तहत इसे घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया।)
5. क्षेत्र के विलय से (By Incorporation of Territory)(धारा -7) : यदि भारत में कोई नया क्षेत्र सम्मिलित होता है , तो वहाँ के लोग भारत के नागरिक बन जाते हैं।
नागरिकता समाप्त होने के आधार (धारा 8-10)
(i)त्याग (Renunciation) : यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ देता है।
(ii)निरसन (Termination): यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है।
(iii)वंचन (Deprivation) : सरकार किसी व्यक्ति की नागरिकता रद्द कर सकती है, यदि उसने झूठ बोलकर नागरिकता प्राप्त की हो या किसी देशद्रोही कार्य में शामिल हो।
नागरिकता के महत्वपूर्ण संशोधन (Amendments) :
(1986,1992,2003,2005,2015,2019 )
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019
यह अधिनियम दिसंबर 2019 में संसद द्वारा पारित किया गया और 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ।
उद्देश्य
🔹प्रवासियों के एक विशेष समूह को नागरिकता प्रदान करना, भले ही उनके पास नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार वैध यात्रा दस्तावेज न हों। इन्हें भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिये पासपोर्ट एवं वीज़ा जैसे दस्तावेज़ों की आवश्यकता नहीं होगी।
आवेदन की शर्त :
🔹 वह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हुए हो ।
🔹 हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के शरणार्थी (Refugees) हो। तथा धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हों।
🔹 उन्होंने 31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले भारत में प्रवेश किया हो
🔹तथा वे इन क्षेत्रों से बाहर हों:
संविधान की छठी अनुसूची में शामिल आदिवासी क्षेत्र (असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा)।
इनर लाइन परमिट (ILP) वाले राज्य: अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड।
🔹सामान्यतः प्राकृतिककरण (Naturalisation) से नागरिकता लेने की अवधि 11 वर्ष थी। CAA, 2019 के तहत इसे घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया।
महत्व :
(i)उत्पीड़ित व्यक्तियों को राहत प्रदान करना।
(ii)जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा करना।
(iii)मानवाधिकारों के सिद्धांतों को बरकरार रखना।
आलोचनाएँ :
(i)इसमें श्रीलंका और म्यांमार के शरणार्थी (जैसे तमिल, रोहिंग्या) शामिल नहीं हैं।
(ii)मुसलमानों, यहूदियों और नास्तिकों (Atheists) को नागरिकता से बाहर रखा गया। अर्थात धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान की गई ।
(iii)यह अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत के उल्लंघन के रूप में देखा गया ।
(iv)केवल 31 दिसंबर, 2014 से पहले आए प्रवासियों पर लागू → समान परिस्थितियों में बाद में आने वालों के साथ अलग व्यवहार।
मुख्य बिंदु :
🔹भारत में एकल नागरिकता (Single Citizenship) की व्यवस्था है।
🔹नागरिकता से जुड़े सभी विषय संविधान की यूनियन सूची (Union List) में आते हैं।
🔹भारतीय संविधान दोहरी नागरिकता (जैसा अमेरिका में है) की अनुमति नहीं देता।
अधिकार एवं नागरिकता:
टी एच मार्शल ने अपनी रचना ' Citizenship and Social class (1950)' में नागरिकता को समुदाय की पूर्ण सदस्यता के रूप में चित्रित किया । उन्होंने नागरिकता के विकास को अधिकारों के साथ जोड़ते हुए अपने विचार व्यक्त किया ।
🔹 नागरिकता के पहले चरण में नागरिक अधिकार प्राप्त हुए जिसमें स्वतंत्रता एवं संपत्ति के अधिकार महत्वपूर्ण है जो संवैधानिक लोकतंत्र में विद्यमान होते हैं ।
🔹 नागरिकता के दूसरे चरण में व्यक्तियों को राजनीतिक अधिकार प्राप्त हुए जिसमें मत देने का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण माना गया ।
🔹 नागरिकता के तीसरे चरण में सामाजिक अधिकार प्राप्त हुए । उनके अनुसार नागरिकता एक सामाजिक परिस्थिति है, क्योंकि जिस समाज में वर्ग विभाजन होता है तथा पूंजीवादी विषमता बनी रहती हैं, वहां पर नागरिकता का विचार प्रभावी नहीं होता ।
मार्शल पूंजीवाद को समाप्त नही करना चाहते, परंतु इसमें सुधार कर कल्याणकारी राज्य के रूप में परिवर्तित करना चाहते हैं।
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नागरिकता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :
प्रश्न 1. नागरिकता क्या है?
उत्तर: नागरिकता वह कानूनी संबंध है जो व्यक्ति और राज्य के बीच स्थापित होता है, जिसके आधार पर व्यक्ति को राजनीतिक, नागरिक और सामाजिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान में नागरिकता से संबंधित प्रावधान कहाँ वर्णित हैं?
उत्तर:
भारतीय संविधान के भाग-II (अनुच्छेद 5 से 11) में नागरिकता से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।
प्रश्न 3. अनुच्छेद 5 किससे संबंधित है?
उत्तर: अनुच्छेद 5 संविधान लागू होने के समय भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित है।
प्रश्न 4. अनुच्छेद 6 और 7 का संबंध किससे है?
उत्तर: अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत आए प्रवासियों की नागरिकता
अनुच्छेद 7: भारत से पाकिस्तान गए और पुनः लौटे व्यक्तियों की नागरिकता
प्रश्न 5. अनुच्छेद 8 किससे संबंधित है?
उत्तर: अनुच्छेद 8 विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) की नागरिकता से संबंधित है।
प्रश्न 6. नागरिकता अधिनियम, 1955 का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 11 के अंतर्गत बनाया गया, जिसका उद्देश्य नागरिकता प्राप्ति, समाप्ति और त्याग की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है।
प्रश्न 7. भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के प्रमुख तरीके कौन-से हैं?
उत्तर: नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार मुख्य 5 तरीके हैं ।
जन्म द्वारा
वंश द्वारा
पंजीकरण द्वारा
प्राकृतिककरण द्वारा
क्षेत्र के समावेशन द्वारा
प्रश्न 8. नागरिकता समाप्त होने के आधार कौन-से हैं?
उत्तर:
नागरिकता समाप्ति के तीन आधार हैं:
त्याग (Renunciation) – धारा 8
समाप्ति (Termination) – धारा 9
हरण (Deprivation) – धारा 10
प्रश्न 9. भारत में दोहरी नागरिकता क्यों नहीं है?
उत्तर:
भारत में एकल नागरिकता प्रणाली है ताकि राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनी रहे।
प्रश्न 10. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 का मुख्य प्रावधान क्या है?
उत्तर:
CAA 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों को नागरिकता देने में राहत दी गई।
प्रश्न 11. क्या CAA 2019 संविधान के भाग-II में संशोधन करता है?
उत्तर: नहीं, CAA 2019 नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करता है, संविधान में नहीं।
प्रश्न 12. नागरिक और विदेशी में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: नागरिक को राजनीतिक अधिकार (मतदान, चुनाव) प्राप्त होते हैं, जबकि विदेशी को नहीं।
प्रश्न 13. कौन-से मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को प्राप्त हैं?
उत्तर:
अनुच्छेद 15
अनुच्छेद 16
अनुच्छेद 19
अनुच्छेद 29 और 30
प्रश्न 14. अनुच्छेद 11 का महत्व क्या है?
उत्तर:
यह संसद को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्रदान करता है।
प्रश्न 15. भारत में नागरिकता और राष्ट्रीयता का संबंध क्या है?
उत्तर: भारत में नागरिकता और राष्ट्रीयता समानार्थी माने जाते हैं।
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