🔹समाजवाद (Socialism) क्या है? समाजवाद का अर्थ।
🔹समाजवाद की परिभाषाएं
🔹भारतीय संविधान में समाजवाद की अवधारणा ।
🔹समाजवाद के जनक
🔹समाजवाद के प्रकार
अराजकतावाद समाजवाद
कल्पनालोकीय समाजवाद (Utopian Socialism)
समूहवाद (Collectivism )
🔹समाजवाद (Socialism) से संबंधित प्रश्नोत्तर
समाजवाद क्या है ? समाजवाद का अर्थ :
(What is Socialism in Hindi)
समाजवाद एक ऐसी आर्थिक,सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था है ,जिसके अनुसार उत्पादन के सभी साधनों (भूमि, मशीन, कारखाने आदि) पर सार्वजनिक स्वामित्व होना चाहिए , न कि व्यक्तिगत होने चाहिए । यह सिद्धांत पूंजीवाद व व्यक्तिवाद का खंडन करता है । 19वीं सदी के आरंभिक दशको में लेस्जेक कोळकोवस्की ने अपनी रचना Main current of Marxism (1976) में बताया की संसार के उपहार समानता के आधार पर वितरित होगे।
🔹 इसके अनुसार व्यक्तिवाद और पूंजीवाद व्यवस्था को परिवर्तित करने की आवश्यकता है , क्योंकि इन व्यवस्था के कारण व्यक्ति लालची एवं स्वार्थी हो गया है । इसलिए समुदायवाद को समाप्त करना चाहिए।
🔹इसके अनुसार समाज में आर्थिक समानता आवश्यक है ,क्योंकि सभी व्यक्ति नैतिक रूप से सामान होते हैं ,और आर्थिक विषमता प्राकृतिक नहीं है ।
🔹 यह समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर एवं अधिकार मिलने की बात करता है ।
🔹यह समाज को आर्थिक आधार पर विभाजित करते हैं, न कि जाति,धर्म या संप्रदाय के आधार पर ।
🔹समाजवाद निजी संपत्ति के विरोधी है , क्योंकि उत्पादन सामूहिक होता है अतः लाभ का वितरण भी सभी में होना चाहिए।
🔹समाजवाद का उद्देश्य मजदूरों व गरीबों के शोषण को रोकना है ।
समाजवाद की परिभाषाएं:
सी ई एम जोड के अनुसार ' समाजवाद एक ऐसे टोपी है , जिसकी शक्ल अत्यधिक धारण किए जाने के कारण बिगड़ गई है । '
सिडनी वेब के अनुसार ' लोकतंत्रात्मक विचार का आर्थिक पक्ष ही समाजवाद है । '
जॉर्ज वनडिशा के अनुसार ' समाजवाद आय की असमानता के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है । '
इमाइल के अनुसार ' समाजवाद का अभिप्राय श्रमिको के ऐसे संगठन से है जिसका उद्देश्य पूंजीवादी संपत्ति को सामाजिक संपत्ति में परिवर्तित करने के लिए राजनीतिक शक्ति प्राप्त करना है । '
कार्ल मार्क्स (Karl Marx) के अनुसार
' समाजवाद वह व्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व होता है और प्रत्येक व्यक्ति से उसकी योग्यता के अनुसार कार्य लिया जाता है तथा उसकी आवश्यकता के अनुसार उसे प्राप्त होता है ।'
लेनिन (Vladimir Lenin) ke अनुसार
' समाजवाद पूँजीवाद से एक कदम आगे का चरण है, जहाँ पूँजीवादी शोषण समाप्त हो जाता है और राज्य मजदूर वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।'
हेरोल्ड लास्की के अनुसार
' समाजवाद वह व्यवस्था है जिसमें आर्थिक असमानता को समाप्त कर प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर देने का प्रयास किया जाता है।'
भारतीय संविधान में समाजवाद की अवधारणा :
🔹 भारतीय संविधान के 42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में “समाजवादी” शब्द जोड़ा गया। तथा भारत को सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य”घोषित किया गया ।
🔹 भारतीय समाज निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रो का सम्मिश्रण है । यहां राज्य द्वारा कल्याणकारी नीतियाँ बनाई जाती है जिससे आर्थिक असमानता को कम किया जा सके तथा शोषण का अंत किया जा सके । इस प्रकार भारतीय समाजवाद लोकतांत्रिक समाजवाद है, न कि मार्क्सवादी समाजवाद ।
🔹 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से 51 तक नीति निदेशक तत्वों का उल्लेख किया गया है जोकि समाजवाद को दर्शाते हैं । जैसे -
अनुच्छेद 38 – सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय
अनुच्छेद 39 – संसाधनों का समान वितरण, धन का केंद्रीकरण रोकना
अनुच्छेद 41 – काम, शिक्षा और सहायता का अधिकार
अनुच्छेद 42 – श्रमिकों के लिए न्यायसंगत कार्य-परिस्थितियाँ
🔹 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 16 तक मौलिक अधिकारो का वर्णन है जोकि लोकतांत्रिक समाजवाद की व्याख्या करते हैं।
अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार
अनुच्छेद 15 – भेदभाव का निषेध
अनुच्छेद 16 – रोजगार में समान अवसर
🔹समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने समाजवाद को संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का हिस्सा माना ।
🔹भारतीय संविधान में समाजवाद का उद्देश्य एक ऐसे कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना करना है,जहाँ अमीर-गरीब के मध्य भेदभाव न हो ,सभी को संविधान के अनुरूप समान अवसर मिले तथा राज्य सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करे ।
समाजवाद के जनक :
कार्ल मार्क्स को वैज्ञानिक समाजवाद का जनक कहा जाता है।क्योंकि उन्होंने समाजवाद को वैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया । कार्ल मार्क्स के अनुसार समाज दो वर्गों में बटा हुआ है , पूंजीवादी वर्ग एवं मजदूर वर्ग । उन्होंने पूंजीवाद को समाप्त करने के लिए वर्ग संघर्ष (Class Struggle) के सिद्धांत की संकल्पना दी तथा शोषणमुक्त समाज की अवधारणा रखी ।
समाजवाद के प्रकार:
विचार, उद्देश्य और तरीकों के आधार पर समाजवाद के कई प्रकार हैं , समाजवाद के विभिन्न रूप लोकतंत्र के अलग अलग पहलुओं पर जोर देते हैं। समाजवाद के कुछ प्रकार निम्नवत हैं।
अराजकतावाद समाजवाद:
समाजवादी विचारों का आरंभिक प्रयोग gerrard winstanley ,विलियम गॉडविन, मिखाईल बाकुनिन के विचारों में पाया जाता है , इनके अनुसार राज्य को समाप्त करके समानता स्थापित करना है , इस कारण इन्हें अराजकतावादी कहा गया ,परंतु समानता के समर्थन के कारण समाजवादी भी कहा गया ।
कल्पनालोकीय समाजवाद (Utopian Socialism) :
समाजवाद का यह विचार प्लेटो के आदर्श राज्य में दिखाई देता है । यह विचारधारा समाज में समानता, सहयोग और सभी के लिए सामान न्याय की कल्पना पर आधारित है । जोकि नैतिकता और मानवता के द्वारा प्राप्त होना चाहिए। परंतु वास्तविक परिस्थितियों में यह संभव होना मुश्किल है, इसलिए इसे utopian समाजवाद कहते हैं।
16वीं, 17वीं सदी में थॉमस मूर, फ्रांसिस बेकन, तथा जेम्स हेरिंगटन ने ऐसे आदर्शवादी समाजवाद की कल्पना की थी ,जिसमें पूर्ण समानता होगी ,किसी प्रकार की विषमता नही होगी ।
🔹 आरंभिक समाजवाद को ही यूटोपियन समाजवाद कहा जाता है ,क्योंकि मार्क्स ने कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में इन्हें कल्पनालोकीय समाजवाद कहा ।
🔹 हेनरी दे सेंट सीमन के अनुसार , औद्योगिक व्यवस्था को मानवीय व तार्किक होना चाहिए तथा वैज्ञानिक व्यवस्था को धार्मिक आधार पर संचालित होना चाहिए। इन्होंने निजी संपत्ति को समाप्त करने का समर्थन किया ।
प्रसिद्ध रचनाएं: Thomos More - Utopia (1516)
Tomasso campanella- The city of the sun (1602)
James harrington - The commonwealth of oceana (1656)
Gerrard winstanely- The law of freedom in a plateform (1652)
समूहवाद (Collectivism) :
समूहवाद वह विचारधारा है ,जिसमें समुदाय की भलाई को महत्व दिया जाता है । विलियम मौरिस ने ब्रिटेन में समाजवादी विचारों को अत्यधिक प्रभावित किया ,उनके अनुसार व्यक्ति के नैतिक क्षमता के विकास के द्वारा समाज में समानता लाई जा सकती है । इन्होंने औद्योगिकरण और पूंजीवाद को मानव की बंधुता और स्वतंत्रता समाप्त करने वाला माना ।
🔹 जॉन रसकिन एवं थॉमस कार्लाइल जैसे कवियों ने भी मानव को नैतिक क्षमताओं पर बल दिया । इंग्लैंड में जे एस मिल के विचारों ने भी समाजवाद को अत्यधिक प्रभावित किया । ब्रिटेन का फेबियान समाजवाद भी जे एस मिल के विचारों से प्रभावित है। ब्रिटिशवासियों के अनुसार समाजवाद की स्थापना के लिए व्यक्तियों को स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए।
🔹सामूहिकवाद में व्यक्ति को एक सामाजिक सामूहिकता जैसे एक राज्य, राष्ट्र, जाति आदि के रूप में देखा जाता है ।
🔹शुरुवाती सामूहिकवादी विचारों को रूसो के सामाजिक अनुबंधों में देखा जाता है , उनके अनुसार व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता को समुदाय या समूह की सामान्य इच्छा प्रस्तुत करने में पाता है ।
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https://www.polsciencenet.in/2025/11/SocialismMarxism.html?m=1
समाजवाद (Socialism) से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. समाजवाद क्या है?
उत्तर: समाजवाद एक ऐसी आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों (जैसे – भूमि, पूंजी, उद्योग आदि) का स्वामित्व राज्य या समाज के हाथों में होता है, न कि निजी व्यक्तियों के। इसका उद्देश्य समानता, सामाजिक न्याय और सबके लिए कल्याण सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 2. समाजवाद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: समाजवाद का मुख्य उद्देश्य है – आर्थिक असमानता को समाप्त करना और सभी नागरिकों को समान अवसर व सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
प्रश्न 3. समाजवाद की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
1. उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व
2. योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था
3. समानता और सामाजिक न्याय
4. श्रमिक वर्ग का कल्याण
5. राज्य का प्रमुख नियंत्रण
प्रश्न 4. समाजवाद के प्रमुख प्रवर्तक कौन थे?
उत्तर: कार्ल मार्क्स, फ्रेडरिक एंगेल्स, सेंट सायमोन, रॉबर्ट ओवेन और चार्ल्स फूरिए समाजवाद के प्रमुख प्रवर्तक माने जाते हैं।
प्रश्न 5. यूटोपियन समाजवाद क्या है?
उत्तर: यूटोपियन समाजवाद वह समाजवाद है जिसमें समाज की आदर्श कल्पना की जाती है लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए व्यावहारिक या वैज्ञानिक तरीका नहीं बताया जाता।
प्रश्न 6. यूटोपियन समाजवाद के प्रमुख विचारक कौन थे?
उत्तर: सेंट सायमोन, रॉबर्ट ओवेन और चार्ल्स फूरिए यूटोपियन समाजवाद के प्रमुख विचारक थे।
प्रश्न 7. यूटोपियन समाजवाद की विशेषता क्या है?
उत्तर: इसमें समाज की आदर्श कल्पना की जाती है जहाँ सब लोग बराबर हों, परन्तु उस आदर्श समाज को प्राप्त करने के लिए ठोस वैज्ञानिक विधि का अभाव होता है।
प्रश्न 8. यूटोपियन समाजवाद की आलोचना क्यों की गई?
उत्तर: इसकी आलोचना इसलिए की गई क्योंकि यह केवल कल्पनाशील था, व्यावहारिक नहीं। कार्ल मार्क्स ने इसे “अवैज्ञानिक समाजवाद” कहा।
प्रश्न 9. समूहवाद क्या है?
उत्तर: समूहवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसमें व्यक्ति से अधिक महत्व समाज या समूह को दिया जाता है। इसमें व्यक्तिगत हित से अधिक सामूहिक हित को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रश्न 10. समूहवाद की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
1. समाज या राज्य सर्वोच्च होता है।
2. व्यक्तिगत संपत्ति की जगह सामूहिक संपत्ति को प्राथमिकता।
3. सामूहिक निर्णय, सहयोग और साझेदारी पर जोर।
4. व्यक्तिगत स्वार्थ को सीमित किया जाता है।
प्रश्न 11. समाजवाद और समूहवाद में क्या अंतर है?
उत्तर:
समाजवाद :
उद्देश्य - आर्थिक समानता
आधार - उत्पादन के साधनों पर राज्य/सामाजिक नियंत्रण
रुप - आर्थिक सिद्धांत
समूहवाद:
उद्देश्य - सामाजिक एकता और सहयोग
आधार -सामूहिक हित की प्रधानता
रुप - सामाजिक/नैतिक सिद्धांत।
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