लोकतंत्र (Democracy) क्या है? लोकतंत्र का अर्थ, परिभाषाएँ, महत्व एवं विशेषताएं, भारतीय संविधान में लोकतंत्र का महत्व, लोकतंत्र के प्रकार (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष), लोकतंत्र के चार स्तंभ और महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर हिंदी में जानिए ।
🔹लोकतंत्र (Democracy) क्या है? लोकतंत्र का अर्थ
🔹लोकतंत्र की परिभाषाएँ (Definition of Democracy)
🔹लोकतंत्र का महत्व एवं विशेषताएं ।
🔹लोकतंत्र का भारतीय संविधान में महत्व ।
🔹लोकतंत्र के प्रकार (Types of Democracy)
प्रत्यक्ष लोकतंत्र
अप्रत्यक्ष लोकतंत्र
🔹लोकतंत्र के चार स्तंभ (Four Pillars of Democracy) कौन कौन से हैं?
🔹लोकतंत्र से संबंधित प्रश्नोत्तर ।
लोकतंत्र (Democracy) क्या है? लोकतंत्र का अर्थ :
लोकतंत्र की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के demos और cresia से हुई। डीमोस का अर्थ है लोग, तथा क्रेशिया का अर्थ है शासन अर्थात लोकतंत्र का आशय है लोगों का शासन ।
लोकतंत्र एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें जनता सर्वोपरि होती है तथा शासन जनता की इच्छा से चलता है । जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करती है और सभी नागरिकों को शासन में भाग लेने का समान अधिकार प्राप्त होता है , शासन की शक्तियां जनता में निहित होती हैं।
लोकतंत्र की परिभाषाएँ (Definition of Democracy)
अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln)
“लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन है।”
अरस्तू के अनुसार :
"लोकतंत्र तब होता है जब दरिद्र शासक हो न कि संपत्तिधारक वर्ग।"
महात्मा गांधी:
“लोकतंत्र का अर्थ है—ऐसा शासन जिसमें हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और वह अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सके।”
लॉर्ड ब्रायस (Lord Bryce)
“लोकतंत्र वह शासन है जिसमें शासन के कार्यों में अंतिम नियंत्रण जनता के हाथ में होता है।”
जॉन स्टुअर्ट मिल (John Stuart Mill):
“लोकतंत्र वह शासन है जिसमें जनता स्वयं या अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करती है।”
अलबर्ट दायसी के अनुसार:
"लोकतंत्र ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें शासकीय निकाय तुलनात्मक रूप से बड़ा होता है।"
सीले के अनुसार, लोकतंत्र ऐसे सरकार है ,जिसमें सभी का हिस्सा होता है ।
लोकतंत्र का महत्व एवं विशेषताएं:
जैसे कि परिभाषित है, लोकतंत्र अर्थात ’जनता का शासन ’ । शासन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोकतंत्र अतिआवश्यक है। लोकतंत्र की प्रमुख विशेषताएं निम्नवत हैं ।
👉 लोकतंत्र में जनता को वोट देने का अधिकार तथा योग्यता के अनुसार चुनाव लड़ने का अधिकार मिलता है,जिससे जनता अपने प्रतिनिधि के माध्यम से शासन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते है।
👉 लोकतंत्र में गरीब- अमीर, ऊंच- नीच , धर्म, जाति आदि के भेदभाव के बिना सभी को सामान अधिकार मिलते हैं।
👉लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही जनता के प्रति होती है, जिससे जनता सरकार के गलत कार्यों पर अंकुश लगा सकती है तथा चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों को और सरकार को बदल सकती है ।
👉 लोकतंत्र नागरिकों को स्वतंत्र रूप से अपनी राय रखने का अवसर प्रदान करता है, जिससे सरकार की नीतियां अगर नागरिकों के हित में नहीं है तो वो उन नीतियों का विरोध कर सकते हैं ।
👉 लोकतंत्र में नागरिकों के मौलिक अधिकारों की जिम्मेदारी सरकार की होती है ,तथा उसकी रक्षा कानून द्वारा की जाती है ,जिससे किसी के साथ अन्याय अथवा अत्याचार होने में रोक लगती है ।
👉 लोकतंत्र में जनता की भागीदारी ज्यादा होने से नीतियां और भी प्रभावकारी और जनता के हित के लिए होती हैं ,जिससे देश के विकास में बनाई गयी योजना में जनहित सर्वोपरि होता है।
👉लोकतंत्र में सत्ता का परिवर्तन हिंसक व क्रांतिकारी न होकर चुनाव के माध्यम से शांति पूर्ण ढंग से होता है ।
लोकतंत्र का भारतीय संविधान में महत्व :
भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसकी आत्मा लोकतंत्र में निहित है। भारत को संविधान द्वारा एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है। भारतीय संविधान में लोकतंत्र का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होता है।
1. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लोकतंत्र की स्थापना :
भारत के संविधान की प्रस्तावना में भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है। इसमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
2. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का उल्लेख :
भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक (18 वर्ष या उससे अधिक आयु) को मतदान का अधिकार प्राप्त है।अर्थात सरकार का गठन जनता के मत के अनुसार होता है ।
3. भारतीय संविधान मौलिक अधिकारों की गारंटी प्रदान करता है । संविधान के भाग–3 (अनुच्छेद 12–35) में मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है ,जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार आदि प्रदान किए गए है । ये अधिकार नागरिकों को सशक्त बनाते हैं।तथा लोकतंत्र की स्थापना करते हैं।
4. भारत में संसदीय लोकतंत्र अपनाया गया है, जहाँ पर
कार्यपालिका, विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है, तथा
प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से बनते हैं । यह व्यवस्था लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत बनाती है।
5. भारतीय संविधान के तहत निर्वाचन आयोग का गठन किया गया जोकि एक स्वतंत्र संस्था है, जो निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करता है। यह लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखता है।
6. भारतीय संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है। न्यायालय संविधान की रक्षा करते हैं तथा नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करते हैं और सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखते हैं ।
7. शक्तियों का विकेंद्रीकरण : संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। भारतीय संविधान का 73वाँ और 74वाँ संशोधन स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज और नगरपालिकाएँ) को सशक्त बनाते हैं, जिससे लोकतंत्र जमीनी स्तर तक पहुँचता है।
8. कानून का शासन (Rule of Law):
भारतीय संविधान में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। यह सिद्धांत लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।
लोकतंत्र के प्रकार (Types of Democracy)
शासन व्यवस्था के आधार पर लोकतंत्र मुख्यता दो प्रकार के होते हैं
1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy )
2. अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधिक) लोकतंत्र ( Indirect Democracy)
प्रत्यक्ष लोकतंत्र ( Direct Democracy):
प्रत्यक्ष लोकतंत्र शासन की वह व्यवस्था है जिसमें जनता स्वयं शासन के निर्णयों में भाग लेती है, जनता खुद कानून बनाती है । इसमें प्रतिनिधि द्वारा शासन नहीं किया जाता बल्कि जनमत संग्रह तथा स्थानीय इकाइयों द्वारा शासन होता है ।
प्रत्यक्ष लोकतंत्र का पहला प्रयोग यूनानी युग में एथेंस में हुआ था । यह लोकतंत्र का आदर्श रूप है । आधुनिक युग में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की संकल्पना रूसो के विचारों में पाई जाती है । रूसो का मानना था कि इंग्लैंड के लोग पांच वर्षों में एक बार स्वतंत्र होते हैं। वर्तमान में प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण है ।
जैसे - स्विट्जरलैंड का लोकतंत्र।
यहां जनता सीधे जनमत संग्रह के माध्यम से निर्णय लेती है।
अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधिक) लोकतंत्र ( Indirect Democracy):
लोकतंत्र की वह व्यवस्था जिसमें जनता स्वयं निर्णय नहीं लेती अपितु अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और चुने हुए प्रतिनिधि जनता की ओर से निर्णय लेते हैं , अप्रत्यक्ष लोकतंत्र कहलाता है। इसमें शासन जनता के प्रति जवाबदेह होती है । इसे प्रतिनिधिक लोकतंत्र भी कहा जाता है ।
जैसे - भारत , ब्रिटेन,अमेरिका आदि।
🔹प्रायः बड़े देशों के लिए अप्रत्यक्ष लोकतंत्र ज्यादा व्यावहारिक होता है ।
🔹जनता चुनाव के माध्यम से सांसद, विधायक आदि चुनती है ,जो उनके लिए कानून बनाते हैं और शासन चलाते हैं।
👉 अप्रत्यक्ष लोकतंत्र को तीन भागों में बांटा गया है ।
(I). संसदीय लोकतंत्र:
संसदीय लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें संसद (Parliament) सर्वोच्च होती है और कार्यपालिका (Executive) संसद के प्रति उत्तरदायी होती है। इस प्रणाली में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, और वे प्रतिनिधि मिलकर संसद बनाते हैं। संसद में बहुमत प्राप्त करने वाली पार्टी या गठबंधन सरकार बनाता है, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करता है। सत्ता की वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री के पास होती है तथा राष्ट्रपति केवल नाम मात्र का प्रमुख होता है ।
जैसे - भारत, ब्रिटेन,जापान में संसदीय लोकतंत्र है ।
(II) राष्ट्रपति प्रणाली का लोकतंत्र :
यह ऐसे शासन प्रणाली है जिसमें राष्ट्रपति ही राष्ट्र और सरकार का प्रमुख होता है ,उसका चुनाव जनता द्वारा सीधे या निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।इस प्रणाली में सरकार के तीन प्रमुख अंग होते है , विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। ये तीनों एक दूसरे से स्वतंत्र होते हैं। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है,और मंत्री राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदाई होते हैं।
जैसे - अमेरिका का लोकतंत्र।
(III) मिश्रित लोकतंत्र:
मिश्रित लोकतंत्र वह शासन व्यवस्था है जिसमें संसदीय लोकतंत्र और राष्ट्पति लोकतंत्र दोनों की विशेषताएं पाई जाती हैं। इसमें राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख और प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है। राष्ट्रपति के पास कुछ स्वतंत्र शक्तियां होती हैं जैसे विदेश नीति ,रक्षा नीति आदि । राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है ।
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद संसद के प्रति उत्तरदाई होते है ,और सरकार अविश्वास प्रस्ताव से गिराई जा सकती है ।
जैसे - फ्रांस, रूस, पुर्तगाल का लोकतंत्र ।
लोकतंत्र के चार स्तंभ :
(Four Pillars of Democracy)
लोकतंत्र की व्यवस्था चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होती है। विधायिका , कार्यपालिका, न्यायपालिका एवं मीडिया । ये स्तंभ लोकतांत्रिक शासन को संतुलित, मजबूत और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं।इनका विस्तृत वर्णन निम्नलिखित है।
1. विधायिका (Legislature) :
विधायिका का मुख्य कार्य कानून बनाना होता है। भारत में विधायिका के दो महत्वपूर्ण सदन (लोकसभा और राज्यसभा) हैं। जिन्हें संसद कहा जाता है। इसमें जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं । ये सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखती है। विधायिका जनता की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती है।
2. कार्यपालिका (Executive):
कार्यपालिका कानूनों को लागू करती है और प्रशासन चलाती है। भारत में कार्यपालिका के प्रमुख अंग राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल हैं । यह सरकारी नीतियों को क्रियान्वित करती है तथा देश का दैनिक प्रशासन संभालती है। कार्यपालिका सरकार के निर्णयों को व्यवहार में लाती है।
3. न्यायपालिका (Judiciary):
न्यायपालिका कानून की व्याख्या और न्याय प्रदान करती है।
भारत में न्यायपालिका सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय के रूप में विद्यमान है। यह
संविधान और मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है । न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा का अधिकार प्राप्त है, यह लोकतंत्र की रक्षक मानी जाती है।
4. मीडिया (Media) :
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। यह जनता और सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है । तथा सरकार की नीतियों और कार्यों की निगरानी करता है तथा सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचता है। मीडिया
जनमत का निर्माण करता है। यह शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
👉 लोकतंत्र के चारों स्तंभ एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। यदि इनमें से कोई भी स्तंभ कमजोर होता है, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाती है। इसलिए इन चारों स्तंभों का सशक्त और स्वतंत्र होना अत्यंत आवश्यक है।
लोकतंत्र से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. लोकतंत्र क्या है?
उत्तर: लोकतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें शासन की शक्ति जनता के हाथ में होती है। इसमें जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर शासन चलाती है।
👉 “जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन ही लोकतंत्र है।”
प्रश्न 2. लोकतंत्र के मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर: लोकतंत्र के दो मुख्य प्रकार हैं —
1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र
2. अप्रत्यक्ष (प्रतिनिधिक) लोकतंत्र
प्रश्न 3. प्रत्यक्ष लोकतंत्र क्या होता है?
उत्तर: प्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता स्वयं शासन के कार्यों में भाग लेती है और सीधे निर्णय लेती है।
उदाहरण: स्विट्ज़रलैंड।
प्रश्न 4. अप्रत्यक्ष लोकतंत्र क्या होता है?
उत्तर: अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है जो उसकी ओर से शासन करते हैं।
उदाहरण: भारत, अमेरिका।
प्रश्न 5. संसदीय लोकतंत्र क्या है?
उत्तर: संसदीय लोकतंत्र में कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी होती है।
प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है और संसद में बहुमत वाली पार्टी सरकार बनाती है।
उदाहरण: भारत, ब्रिटेन।
प्रश्न 6. राष्ट्रपति लोकतंत्र क्या है?
उत्तर: राष्ट्रपति लोकतंत्र में राष्ट्रपति ही राज्य और सरकार दोनों का प्रमुख होता है। वह सीधे जनता द्वारा चुना जाता है और संसद से स्वतंत्र होता है।
उदाहरण: अमेरिका।
प्रश्न 7. मिश्रित लोकतंत्र क्या है?
उत्तर: मिश्रित लोकतंत्र में संसदीय और राष्ट्रपति दोनों प्रणालियों की विशेषताएँ होती हैं।
इसमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों होते हैं।
उदाहरण: फ्रांस।
प्रश्न 8. लोकतंत्र की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
1. जनता सर्वोच्च होती है।
2. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव।
3. समान अधिकार और अवसर।
4. कानून का शासन।
5. नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार।
प्रश्न 9. भारत में कौन-सा लोकतंत्र है?
उत्तर: भारत में अप्रत्यक्ष और संसदीय लोकतंत्र है, जहाँ जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और सरकार संसद के प्रति उत्तरदायी होती है।
प्रश्न 10. लोकतंत्र क्यों आवश्यक है?
उत्तर: लोकतंत्र आवश्यक है क्योंकि यह जनता को स्वतंत्रता, समानता और न्याय प्रदान करता है तथा उन्हें शासन में भाग लेने का अधिकार देता है।
प्रश्न 11. अरस्तू के अनुसार लोकतंत्र क्या है?
उत्तर: अरस्तू के अनुसार लोकतंत्र वह शासन है जिसमें गरीब वर्ग का शासन होता है।
प्रश्न 12. भारतीय संविधान में लोकतंत्र का महत्व बताइए।
उत्तर: भारतीय संविधान भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है। सार्वभौमिक मताधिकार, मौलिक अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और संसदीय शासन प्रणाली लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाते हैं।
प्रश्न 13. लोकतंत्र के चार स्तंभ कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
विधायिका
कार्यपालिका
न्यायपालिका
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