नारीवाद क्या है ? नारीवादी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य , नारीवादी विचारधारा ,नारीवाद के प्रकार, उदारवादी नारीवाद (सिद्धांत, आलोचना,) ।
🔹नारीवाद क्या है? ( Feminism in hindi)
🔹नारीवाद का उद्देश्य
🔹नारीवादी विचारधारा (Feminist ideology)
🔹नारीवाद के प्रकार ( Types of Faminism)
🔹 उदारवादी नारीवाद
🔹नारीवाद से संबंधित प्रश्नोत्तर
नारीवाद (Faminism) क्या है ?
नारीवाद शब्द का पहली बार उपयोग काल्पनिक समाजवादी चार्ल्स फोरियर ने 1837 में महिलाओं के लिए समान अधिकार का उल्लेख करने के लिए किया । नारीवाद राजनीतिक,आर्थिक ,सामाजिक और लैंगिक समानता को प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया एक आंदोलन है । नारीवादी आंदोलन को तीन चरणों में विभाजित किया गया है ।
🔹 राजनीतिक अधिकार -नारीवादी आंदोलन के प्रथम चरण में महिलाओं के राजनीतिक अधिकार(मुख्यता वोट का अधिकार) पर अधिक जोर दिया गया यह आंदोलन 19वीं सदी से 20वीं सदी की शुरुआत तक सक्रिय रहा ।
🔹 सामाजिक अधिकार - नारीवादी आंदोलन के दूसरे चरण में महिलाओं को सामाजिक समानता और कानूनी समानता के अधिकार पर अधिक बल दिया गया इसकी शुरुआत उदारवादी आंदोलन के साथ 1960 के दशक से हुई ।
🔹 आर्थिक अधिकार - नारीवादी आंदोलन का तीसरा चरण दूसरे चरण का ही विस्तार है जिसमें दूसरे चरण के आंदोलन की कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया। इस आंदोलन के तहत आर्थिक समानता पर भी जोर दिया गया,इसकी शुरुआत 1990 में हुई ।
नारीवाद का उद्देश्य:
नारीवादी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है
🔹 नारीवादी आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा , वेतन, रोजगार, राजनीति आदि में नारियों को बराबर का अधिकार देना । तथा लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव को समाप्त करके लैंगिक समानता स्थापित करना ।
🔹 महिलाओं को निर्णय लेने की शक्ति एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करना । जिससे वह भी सामाजिक कार्यों में बराबर योगदान दे सके ।
🔹 बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक शोषण आदि को समाप्त करना ।
नारीवादी विचारधारा ( Feminist ideology) :
नारीवादी विचारधारा उत्तर आधुनिक विचारधारा है इसकी उत्पत्ति द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात हुई । यद्यपि मैरी वॉल्स्टोनक्राफ्ट तथा मिल ने पुरुषों व महिलाओं के मध्य भेदभाव समाप्त करने पर जोर दिया। इन्होंने पुरुषों व महिलाओं को समान कार्य के लिए समान वेतन का समर्थन किया एवं महिलाओं को भी सामान स्वतंत्रता और अधिकार प्रदान करने का समर्थन किया ।
👉 उदारवादी विचारकों में लाक व बेन्थम ने मानवीय सामानता पर बल दिया परंतु महिलाओं की समानता की उपेक्षा की । रूसो ने भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में बौद्धिक रूप से हीन माना । इसलिए महिलाओं की समान शिक्षा का समर्थन नहीं किया ।
नारीवाद के प्रकार(Types of Feminism):
उदारवादी नारीवाद
उग्र नारीवाद (क्रांतिकारी)
समाजवादी नारीवाद
अश्वेत नारीवाद
पारिस्थितिकी नारीवाद
सांस्कृतिक नारीवाद
आध्यात्मिक नारीवाद
उदारवादी नारीवाद क्या है ?
उदारवादी नारीवाद , नारीवादी आंदोलन का पहला चरण है इसकी पहली महत्वपूर्ण प्रवक्ता मेरी वॉल्स्टोनक्राफ्ट थी।
इन्होंने अपनी रचना ' A Vindication of the rights of Women' में पुरुषों के समान महिलाओं के लिए भी समान अधिकार का समर्थन किया । उनके अनुसार महिलाओं को शिक्षा व अवसर, पुरुषों के समान प्राप्त होने से राजनीतिक व सामाजिक जीवन में लैंगिक भेदभाव समाप्त किया जा सकता है । इसलिए महिलाओं को मताधिकार का अधिकार एवं पुरुषों के सामान सभी अधिकार प्रदान किये जाने चाहिए ।
🔹 द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात अमेरिकी विचारको में बैट्टी फ्रीडन ने अपनी रचना ' The Feminine Mystique' में महिलाओं की घरेलू जीवन में सुरक्षा एवं पूर्णता की प्राप्ति संबंधित संस्कृतिक मिथ्या को दूर करने का प्रयास किया ।
उनके अनुसार महिलाओं के समक्ष सबसे बड़ी समस्या बेनाम की समस्या है क्योंकि महिलाएं घरेलू कार्यों में रहने के कारण सार्वजनिक जीवन में अपने व्यक्तित्व का विकास करने में असमर्थ होती हैं ।
🔹 उदारवादी नारीवाद की मूल मान्यता व्यक्तिवादी आधार पर निर्मित है सभी व्यक्तियों का सामान नैतिक महत्व है । इसलिए उनके साथ लिंग ,प्रजाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए । व्यक्ति का महत्व उसकी प्रतिभा गुण और चरित्र के आधार पर होना चाहिए । इसलिए उदारवादियों ने सभी के लिए समान अधिकारों का समर्थन किया । जे एस मिल ने महिलाओं के लिए समान नागरिकता और सामान राजनीतिक अधिकारों का समर्थन किया ।
🔹 उदारवादी नारीवाद महिलाओं और पुरुषों के मध्य प्रकृति एवं प्रवृत्ति में भेद मानते हैं । उनके अनुसार महिलाओं का झुकाव परिवार एवं घरेलू जीवन के प्रति स्वाभाविक होता है अतः फ्रीडन ने महिलाओं के लिए घर एवं परिवार को केंद्रीय रूप में महत्वपूर्ण माना लेकिन आमूल नारीवादियों ने इस मान्यता को अस्वीकृत कर दिया ।
उदारवादी नारीवाद की आलोचना :
उदारवादी नारीवादियों के विचार में एक बड़ी त्रुटि है, जिसकी ओर आमूलवादी नारीवादियों ने ध्यान आकर्षित किया है ,क्योंकि आमूल नारीवादियों के अनुसार महिला को व्यक्ति के रूप में नहीं अपितु उसका लैंगिक रूप में शोषण हुआ है । आमूलवादी नारीवादियों के अनुसार, उदारवादियों द्वारा मानवीय आधार पर महिलाओं की समस्या को हल करने का प्रयास किया गया लेकिन जब तक महिलाओं में एक सामूहिक पहचान और एकता निर्मित नहीं होगी तब तक लैंगिक समानता प्राप्त नहीं हो सकती । इसलिए आमूलवादी सिस्टर हुड (Sisterhood) की संकल्पना देते हैं।
🔹 उदारवादी नारीवाद ने लैंगिक विभाजन को दूर करते हुए पुरुष और महिला के मध्य समानता का समर्थन किया। जबकि आमूलवादी विचारक महिला की एक पृथक पहचान और एक पृथक अस्तित्व के लिए संघर्षरत है ।
उदारवादी नारीवाद के सिद्धांत:
उदारवादी नारीवाद के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित है।
🔹 व्यक्तिवाद : उदारवादी नारीवाद व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर आधारित है , उदारवादी नारीवाद स्त्रियों को अपने जीवन का निर्णय स्वयं लेने का समर्थन करता है ।
🔹 समान अधिकार: उदारवादी नारीवाद के अनुसार स्त्रियों को पुरुषों के समान ही शिक्षा, रोजगार ,कानून एवं राजनीति के क्षेत्र में सामान अधिकार प्राप्त होना चाहिए।
🔹 व्यावहारिकता : कई उदारवादी नारीवाद सुधार के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हैं , वह लोकतंत्र के शासन द्वारा सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक अधिकार प्राप्त करने के पक्ष में हैं ।
🔹 पारिवारिक और सामाजिक भूमिका : उदारवादी नारीवाद स्त्रियों को घरेलू कार्यों और सामाजिक जीवन दोनों क्षेत्रों में समान भागीदारी का अधिकार देता है ।
नारीवाद से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: नारीवाद क्या है?
उत्तर: नारीवाद एक सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक आंदोलन है जो महिलाओं के अधिकारों, समानता और स्वतंत्रता की वकालत करता है तथा लैंगिक भेदभाव का विरोध करता है।
प्रश्न 2: नारीवाद का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: समाज में स्त्री-पुरुष के बीच समान अधिकार, अवसर और सम्मान सुनिश्चित करना।
प्रश्न 3: नारीवाद के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
1. उदारवादी नारीवाद
2. मार्क्सवादी नारीवाद
3. उग्र/रेडिकल नारीवाद
4. सांस्कृतिक नारीवाद
5. समाजवादी नारीवाद
6. पारिस्थितिकी नारीवाद
7. अश्वेत नारीवाद
प्रश्न 4: नारीवाद का उदय कब हुआ?
उत्तर: आधुनिक नारीवाद का उदय 19वीं और 20वीं सदी में महिलाओं के मताधिकार आंदोलनों के साथ हुआ।
प्रश्न 5: नारीवाद किन समस्याओं के विरुद्ध आवाज उठाता है?
उत्तर:
लैंगिक भेदभाव
घरेलू हिंसा
वेतन असमानता
शिक्षा में असमानता
बाल विवाह और दहेज प्रथा
प्रश्न 6: उदारवादी नारीवाद क्या है?
उत्तर: उदारवादी नारीवाद वह विचारधारा है जो कानून और संवैधानिक सुधारों के माध्यम से महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिलाने पर जोर देती है।
प्रश्न 7: उदारवादी नारीवाद की मूल मान्यता क्या है?
उत्तर: सभी मनुष्य समान हैं और स्त्रियों को भी पुरुषों के समान अवसर और अधिकार मिलने चाहिए।
प्रश्न 8: उदारवादी नारीवाद की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
समान अधिकारों की मांग
शिक्षा में समानता
कानूनी सुधारों पर विश्वास
लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन
व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर
प्रश्न 9: उदारवादी नारीवाद किन माध्यमों से परिवर्तन चाहता है?
उत्तर: शांतिपूर्ण, संवैधानिक और कानूनी तरीकों से।
प्रश्न 10: उदारवादी नारीवाद और उग्र नारीवाद में अंतर बताइए।
उत्तर:
उदारवादी नारीवाद सुधारात्मक होता है, जबकि उग्र नारीवाद क्रांतिकारी।
उदारवादी नारीवाद व्यवस्था के भीतर बदलाव चाहता है, उग्र नारीवाद व्यवस्था को बदलना चाहता है।
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