नारीवाद के प्रकार(Types of Feminism):
उदारवादी नारीवाद
उग्र नारीवाद (क्रांतिकारी)
समाजवादी नारीवाद /मार्क्सवादी नारीवाद
अश्वेत नारीवाद
पारिस्थितिकी नारीवाद
सांस्कृतिक नारीवाद
आध्यात्मिक नारीवाद
उदारवादी नारीवाद:
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उग्र-नारीवाद( रेडिकल नारीवाद) :
उग्र नारीवाद के अनुसार पुरुषों और महिलाओं के मध्य सार्वजनिक और आर्थिक जीवन में विषमता का कारण पारिवारिक या निजी क्षेत्र में व्याप्त विषमता है । इन्हें निम्नवत रूपों में देखा जा सकता है ।
(i) पितृसत्ता
(ii) सेक्स और जेंडर का घाल- मेल।
(iii) घरेलू कार्यों का मूल्यांकन न होना ।
(iv) राजनीति को केवल सार्वजनिक जीवन तक सीमित करना ।
आमूल नारीवादियों ने सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के अधीनता व शोषण के मूल कारणों की खोज की। उनके अनुसार निजी जीवन व सार्वजनिक जीवन के मध्य विभाजन ही महिलाओं के शोषण का कारण है । परंपरागत रूप में राजनीति को सार्वजनिक जीवन की गतिविधि के रूप में जाना गया तथा इसे निजी जीवन से दूर रखा गया । यह विभाजन मूलतः अरस्तु के विचारों की देन है । क्योंकि अरस्तु ने पारिवारिक जीवन को निजी और गैर - राजनीतिक क्षेत्र माना ।
🔹 नारीवादियों के अनुसार राजनीति प्रत्येक क्षेत्र में विद्यमान है जहां पर भी सामाजिक संघर्ष है । केट मिलेट ने अपनी रचना "Sexual Politics" में राजनीति को परिभाषित किया है । उनके अनुसार राजनीति एक समूह द्वारा दूसरे समूह को नियंत्रित करने की शक्ति अथवा संबंध है ,जैसे सरकार व नागरिक के बीच संबंध , पति और पत्नी के बीच संबंध , कर्मचारी और मालिक के बीच संबंध राजनीति का क्षेत्र है ।
🔹 नारीवादियो ने उदारवादियों मार्क्सवादी विचारों का प्रभावी विकल्प प्रस्तुत किया , उनके अनुसार राज्य एक तटस्थ संस्था नहीं है क्योंकि राज्य के द्वारा महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है । कैरोल पेटमैन के अनुसार पितृ सत्ता के अधीन रहते हुए महिलाएं स्वतंत्र नहीं हो सकती है । उनके अनुसार महिलाएं अभी भी प्राकृतिक अवस्था में रह रही हैं क्योंकि उन्हें अपने शरीर पर ही स्वतंत्रता प्राप्त नहीं है ।
🔹 नारीवादियों के अनुसार महिलाओं की स्वतंत्रता का अभिप्राय बच्चे पैदा करने की स्वतंत्रता, विवाह की स्वतंत्रता, गर्भपात का अधिकार ,घरेलू हिंसा से मुक्ति आदि है । उपरोक्त स्वतंत्रता मिलने के पश्चात ही महिलाओं के लिए नागरिक व आर्थिक स्वतंत्रता का महत्व होगा।
🔹 नारीवादियो ने जॉन रॉल्स की न्याय के सिद्धांत का जोरदार खंडन किया क्योंकि रॉल्स ने पितृसत्ता को स्वाभाविक माना । ओकिन के अनुसार , रॉल्स ने परिवार को नागरिकता की पाठशाला व नागरिकों को सामाजिक बनाने का मूल स्थान माना । लेकिन इन्होंने परिवार में लैंगिक न्याय को अनदेखा कर दिया और परिवार को न्याय पूर्ण मान लिया । जबकि नारीवादियों ने सार्वभौमिकता व समानता के बजाय विभेद पर बल दिया ।
समाजवादी नारीवाद/ मार्क्सवादी नारीवाद :
समाजवादी नारीवादी विचारधारा 20 वीं सदी के मध्य से प्रभावी हुई । इन्होंने उदारवादी विचारधारा के अनुसार राजनीतिक और वैधानिक रूप में ही महिलाओं को समान अधिकार देने का समर्थन नहीं किया ,बल्कि इनके अनुसार लिंग के मध्य असमान संबंध सामाजिक-आर्थिक संरचना के कारण है । इनके अनुसार जब तक सामाजिक आर्थिक संरचना में परिवर्तन नहीं होगा, महिलाओं की स्थिति बेहतर नहीं हो सकती।
🔹 संयुक्त राष्ट्र संघ की 1980 के रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं पूरे विश्व की जनसंख्या का 50% है और कार्य के अनुसार 2/3 हिस्से का संपादन करती हैं । परंतु उनकी आय विश्व की आय का 1/10 भाग और विश्व की संपत्ति में महिलाओं का हिस्सा एक प्रतिशत भी नहीं है । अतः समाजवादी नारीवाद के अनुसार पितृसत्तात्मक सत्ता को बेहतर रूप में सामाजिक आर्थिक कारकों के माध्यम से देखा जा सकता है । फ्रेडरिक एंगेल्स ने अपनी रचना " The origin of the family ,private property and The state " में वर्णित किया है कि पूंजीवादी व्यवस्था और निजी संपत्ति के प्रादुर्भाव से महिलाओं की स्थिति वंचित हुई, क्योंकि पूंजीवादी व्यवस्था से पहले पारिवारिक जीवन साम्यवादी तथा समाज मातृ सत्तात्मक था । फ्रेडरिक एंगेल्स के अनुसार , महिलाओं का शोषण परिवार नामक संस्था द्वारा ही होता है क्योंकि महिलाओं को परिवार में समान अधिकार प्राप्त नहीं होता । इसलिए एंगेल्स के अनुसार समाजवादी समाज में विवाह नहीं होगा तथा जैसे ही निजी संपत्ति की समाप्ति होगी पितृ सत्ता का अंत स्वाभाविक रूप से हो जाएगा ।
🔹 समाजवादी नारीवाद के अनुसार घरेलू कार्यों का महत्व और मूल्य न होने के कारण महिलाओं की समाज में दुर्बल स्थिती है तथा वित्तीय रूप में वह अपने पति पर निर्भर होती है इसलिए आर्थिक विषमता स्वाभाविक रूप में उत्पन्न होती है । इसलिए जब तक महिलाओं को सामाजिक आर्थिक अवसर प्रदान नहीं किए जाएंगे तब तक महिलाओं का उत्थान नहीं हो सकता ।
🔹 समाजवादी नारीवाद के अनुसार वर्गीय शोषण ज्यादा गहरा एवं प्रभावकारी है ना कि लैंगिक शोषण । इसका तार्किक अभिप्राय है कि महिलाओं का शोषण पुरुषों के द्वारा नहीं अपितु पूंजीवाद व्यवस्था के कारण है अतः समाजवादी क्रांति के पश्चात महिलाओं की मुक्ति स्वाभाविक रूप में हो जाएगी ।
🔹 आलोचना: आधुनिक समाजवादी नारीवाद वर्गीय राजनीति को लैंगिक राजनीति की तुलना में अधिक महत्व देते हैं इन नारीवादियों के अनुसार समाजवाद स्वाभाविक रूप में पितृसत्तात्मक व्यवस्था की अंत का कारण होगा । परंतु व्यावहारिक रूप में यह सही प्रतीत नहीं होता क्योंकि सोवियत संघ (U.S.S.R.)जैसी समाजवादी व्यवस्था में महिलाओं के उत्थान पर उतना बल नहीं दिया गया । इसलिए नारी मुक्ति का मुद्दा ज्यादा व्यापक और गहरा है ,केवल पूंजीवादी व्यवस्था के समाप्त होने से लैंगिक समानता प्राप्त हो जाएगी, ऐसा मानना सत्य प्रतीत नहीं होता ।
अश्वेत नारीवाद:
जिस नारीवादी आंदोलन एवं विचारधारा को अमेरिका की श्वेत महिलाओं के द्वारा आरंभ किया गया , वह अश्वेत नारीवाद कहलाया। Angela Davis के अनुसार अश्वेत महिलाओं की समस्या को किसी ने नहीं उठाया। अश्वेत महिलाएं दो प्रकार के शोषण से ग्रसित हैं । पितृसत्ता एवं प्रजाति भेदभाव । इसलिए अश्वेत नारीवादियों ने नारीवादी विचारधारा को स्वीकार नहीं किया ।
🔹 अश्वेत नारीवादियों के अनुसार ,समाजवादी नारीवाद रंगभेद के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते । समाजवादी नारीवाद एक संस्कृति या समूह को श्रेष्ठ मान लिए हैं तथा अश्वेत नारीवादी ,विभेद या अंतर के मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हैं । अश्वेत नारीवादियों के अनुसार सभी महिलाएं समान है चाहे वह गोरी हों,काली हों, विश्वविद्यालय से पढ़ी-लिखी अथवा मध्यम पृष्ठभूमि से हों। ब्रिटेन के संदर्भ में उनका मानना है कि वह बाहरी मानी जाती है उनकी संस्कृति का कोई महत्व नहीं है , उन्हें दूसरी प्रजाति का माना जाता है ।
🔹 इसलिए ऐसा माना जाता है कि उनके लिए पितृसत्तात्मक और प्रजातीय दोनों भेदभाव महत्वपूर्ण है । गेल रूबिन के अनुसार अश्वेत महिलाओं का अस्तित्व ही नहीं है क्योंकि उनकी पहचान इस समाज में अनुपस्थित है ।
1970 के दशक में आमूल नारीवादियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जिन्हें अश्वेत नारीवादियों ने उठाया था।
पारिस्थितिकी नारीवाद:
पारिस्थितिकी नारीवाद शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम फ्रांसीसी महिलावादी विचारक ' francoise d eaubonne' द्वारा 1974 में किया गया । पारिस्थितिकी नारीवाद के विचारको ने प्रकृति पर मानवीय प्रवृत्ति को समझने का प्रयास किया।
उनके अनुसार जैसे मानव का प्रकृति पर नियंत्रण होता है वैसे ही पुरुष ने महिला पर नियंत्रण किया । नारीवाद की अधीनता प्रकृति की अधीनता के समान है । पारिस्थितिकी नारीवाद के अनुसार महिलाओं का स्वभाव प्रकृति के ज्यादा निकट है , जिस प्रकार पितृसत्ता के द्वारा प्रकृति अर्थात महिलाओं का शोषण किया जाता है उसी प्रकार पितृ सत्ता के द्वारा ही पर्यावरण का विनाश हुआ । महिलाओं का मूल गुण देखभाल करना ,सहानुभूति करना तथा प्रेम करना है जो गुण प्रकृति में भी पाए जाते हैं । परंतु पितृ सत्ता के द्वारा महिलाओं की गुणों की उपेक्षा की गई ।
सांस्कृतिक नारीवाद:
सांस्कृतिक नारीवाद, नारीवादी विचारधारा का वह स्वरूप है जो मानता है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में विशेष गुण होते है । जैसे संवेदनशीलता , सहयोग, शांति, करुणा आदि । महिलाओं के इन गुणों को समाज में महत्व दिया जाना चाहिए। इनके अनुसार पितृसत्ता द्वारा निर्मित की गई संस्कृति जीवन पर हावी हो जाती है और महिलाओं के गुणों और स्वभाव को कमतर आंका जाता है । सांस्कृतिक नारीवाद इसे बदलना चाहता है ।
🔹आलोचना : सांस्कृतिक नारीवाद जैविक और प्राकृतिक गुणों को अधिक महत्व देता है । परंतु सभी महिलाओं के अनुभव और गुण एक समान नहीं होते । यह विविधता को अनदेखा करता है ।
आध्यात्मिक नारीवाद :
आध्यात्मिक नारीवाद यह मानता है कि प्रकृति के सबसे करीब महिलाएं हैं, यह महिला शक्ति, आध्यात्मिकता, धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को स्त्री-सशक्तिकरण से जोड़कर देखती है। इनके अनुसार इन गुणों के कारण महिलाओं को समाज में सम्मान मिलना चाहिए। जबकि परिवर्तनवादियों का मानना है की प्रकृति के साथ संबंधों के अलावा महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में भी होना चाहिए ।
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