पारिस्थितिकी क्या है? | पारिस्थितिकीवाद, प्रकार, गहन एवं ऊपरी पारिस्थितिकी | Ecology in Hindi
🔹पारिस्थितिकी (Ecology) क्या है ?
🔹पारिस्थितिकी वाद का सैद्धांतिक पक्ष ।
🔹पारिस्थितिकी के प्रकार (Types of ecology in Hindi)
ऊपरी पारिस्थितिकी (Shallow Ecology)
गहन पारिस्थितिकी (Deep Ecology)
पारिस्थितिकी (Ecology) क्या है :
पारिस्थितिकी मानव, सभी जीवित जीवो और उनके भौतिक वातावरण के मध्य संबंधों का अध्ययन है । यह सभी जीवो, पेड़-पौधों और उनके मध्य संबंधों को समझने तथा प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान करता है । इसके अनुसार प्राकृतिक साधनों का उपयोग इस प्रकार होना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी के लिए भी स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण हो सके ।
पारिस्थितिकीवाद (Ecologism)क्या है ?
परिस्थितिकी विज्ञान शब्द का उपयोग सबसे पहले 1870 में जर्मन प्राणिशास्त्री अर्न्स हैकल द्वारा किया गया था । 1970 से पूर्व पर्यावरणवाद को समाजशास्त्री सिद्धांत की एक शाखा माना जाता था, जोकि मानवीय संस्कृतियों के मध्य अंतर की व्याख्या करने के लिए ,भूमि ,जलवायु एवं भोजन सामग्री की आपूर्ति को एक महत्वपूर्ण कारक मानती है। 1970 के पश्चात पर्यावरणवाद और पारिस्थितिकी वैज्ञानिक आंदोलन एक सामाजिक- राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने लगे, और एक नए प्रकार के पर्यावरणीय राजनीतिक विचारधारा पारिस्थितिकीवाद का उदय हुआ ।
🔹 पर्यावरण को मानवीय जीवन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जान पासमोर के अनुसार मानव के संदर्भ में तीन तरह के पर्यावरण व्यवस्था को देखा जा सकता है ।
(i) सभी सामान सामाजिक आचरण, मनुष्य के सामाजिक पर्यावरण को निर्मित करते हैं ।
(ii) प्रत्येक व्यक्ति के पास कई प्रकार की भौतिक वस्तुएं होती हैं ,जो दूसरे व्यक्तियों के द्वारा मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निर्मित होती है । यह वस्तुएं निर्मित पर्यावरण को जन्म देती है ।
(iii) तीसरे प्रकार का पर्यावरण प्राकृतिक पर्यावरण है इसके बारे में वर्तमान में सबसे अधिक चिंता व्यक्त की जा रही है ।
पारिस्थितिकी वाद का सैद्धांतिक पक्ष :
आर्ने नेस के अनुसार पर्यावरणविद दो प्रकार के समूह में विभक्त है ऊपरी पर्यावरणविद् , गहन पर्यावरणविद् ।
इन दोनों में अंतर सैद्धांतिक स्तर पर ही है ,व्यावहारिक स्तर पर नहीं । पर्यावरणविद की प्राकृतिक स्रोतों के समाप्त होने की कल्पना को अर्थशास्त्री और प्रौद्योगिकविद स्वीकार नहीं करते । इस आधार पर क्लब ऑफ रोम रिपोर्ट "द लिमिट टू ग्रोथ "की आलोचना की गई है ।
रीगल ने अपनी पुस्तक ' द केस फॉर एनिमल राइट' में स्तनपाई पशुओं को अधिकार देने की वकालत की । पीटर सिंगर ने अपनी रचना ' एनिमल लिबरेशन '(1975) में सभी पशुओं के समान व्यवहार पर जोर दिया ।
🔹 डाँब्सन ने पारिस्थितिकी वाद विचारधारा को दो भागों में विभाजित किया, अधिकतमवाद व अल्पमतवाद ।
अधिकतमवादी इस राजनीतिक विचारधारा को संगठित और संकीर्ण रूप प्रदान करते हैं । अल्पमतवादी पर्यावरण की समस्या को केवल 20वीं सदी और आधुनिकता की देन नहीं मानते बल्कि इसे एक शाश्वत समस्या मानते हैं ।
पारिस्थितिकी के प्रकार (Types of ecology in Hindi):
पर्यावरण का विचार यूरोप में 1970 के दशक के पश्चात आया । क्योंकि उदारवादी चिंतन में व्यक्ति की स्वायत्तता पर ध्यान दिया गया, समाजवादी विचारों में वर्ग को बल दिया गया ,फासीवादियों का केंद्र राष्ट्र पर है , नारीवादी लिंग को महत्व देते हैं । 1970 के दशक में अर्ने नेस ने पर्यावरण को संबोधित करते हुए , मनुष्य को पर्यावरण संकट के केंद्र में रखकर पारिस्थितिकीवाद के दो प्रकारों का उल्लेख करते है।
ऊपरी पारिस्थितिकी (shallow ecology)
गहन पारिस्थितिकी (deep ecology)
ऊपरी पारिस्थितिकी (Shallow Ecology):
ऊपरी पारिस्थितिकी के अनुसार पर्यावरण को केवल मानव हितों को पूरा करने के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए ।
इसके प्रतिपादक मानव जीवन की वर्तमान शैली को, पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से कुछ विशेष बदलाव करते हुए , जारी रखने में विश्वास रखते हैं।
परिस्थितिकीवाद का यह प्रकार विकसित देशों में रहने वालो की जीवन शैली को बनाए रखने का कार्य करती है।
गहन पारिस्थितिकी (Deep Ecology):
अर्ने नेस के अनुसार प्रकृति को बचाने के लिए मानवीय जीवन शैली में परिवर्तन करना चाहिए , जो मूलतः उपभोक्तावादी है । गहन पारिस्थितिकी के विचार में मानव एक भाग है न कि श्रेष्ठ भाग । इनके समर्थकों ने मनुष्य को जीवन के अन्य रूपों से अधिक प्राथमिकता देने के ऊपरी पारिस्थितिकी के विचार को अस्वीकार कर दिया ।
परंतु बाद में पर्यावरणीय रूप से अधिक विनाशकारी जीवन शैली को अपनाया । टेड टर्नर के अनुसार प्रत्येक अमेरिकन एक सामान्य इथियोपियन की तुलना में 617 गुना अधिक ऊर्जा प्रतिवर्ष उपयोग में ले रहा है ।
🔹गहन पारिस्थितिकीवाद एक बड़े पैमाने पर जीवन शैली में बदलाव करके प्रकृति को बनाए रखने की मंशा रखता है।
इसके अलावा यह पर्यावरण संरक्षण के लिए मजबूत नीति निर्माण एवं उसका कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करता है।
पारिस्थितिकी विज्ञान की आलोचना :
पारिस्थितिकीवाद,प्रति विकास की सीमा के सिद्धांत पर आधारित है । जिसके अनुसार सीमित प्राकृतिक संसाधनों के संदर्भ में प्रति विकास असीमित नहीं हो सकता ।
🔹 पारिस्थितिकी वाद के अनुसार अगर विकास को सतत बनाना है तो वह मानव केंद्रित नहीं होना चाहिए , इस प्रकार वह मानव केंद्रित विकास की अवधारणा की आलोचना करता है ।
🔹 पर्यावरणवादियों की पर्यावरण बचाओ आंदोलन के प्रति अत्यधिक उत्साह राजनीतिक क्षेत्र में ऐसी विचारधारा को बढ़ावा देता है ,जो प्रजातंत्र और स्वतंत्रता में विश्वास नहीं रखते और फांसीवादी और सर्व सत्तावादी विचार को प्रोत्साहन देते हैं ।
👉 21वीं सदी में पारिस्थितिकीवाद की विचारधारा परिवर्तित हो गई है , सरकारी नीतियों ,जन चेतना और विज्ञान की विकास के कारण परिस्थितिकी विज्ञान की अपील जनसाधारण में कम हुई है ।
👉 पारिस्थितिकी का जनक अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट को माना जाता है, जिन्होंने जीवों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन प्रस्तुत किया। भारत में पारिस्थितिकी का जनक रामदेव मिश्रा को कहा जाता है, जिन्होंने भारत में पारिस्थितिकी की नींव रखी और इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पारिस्थितिकी का जनक → अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट
भारत में पारिस्थितिकी का जनक → रामदेव मिश्र
➡️ राजनीति विज्ञान के अन्य टॉपिक से संबंधित जानकारी के लिए हमारी नीचे दी हुई वेबसाइट को विजिट करें 👉
प्रश्नोत्तर
1. पारिस्थितिकी के जनक किसे कहा जाता है?
अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट को।
2. पारिस्थितिकीवाद क्या है?
प्रकृति-केंद्रित राजनीतिक विचारधारा।
3. गहन पारिस्थितिकी क्या है?
मानव जीवनशैली में बड़े परिवर्तन करके प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता देना।
4. ऊपरी पारिस्थितिकी क्या है?
मानव हितों के लिए प्रकृति संरक्षण।
5. Ecology UPSC में क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह पर्यावरण, विकास और नीतियों से सीधे जुड़ा है।
#polsciencenet
0 टिप्पणियाँ