उत्तर-आधुनिकतावाद (Post Modernism) क्या है ? परिभाषा, विखंडनवाद, मुख्य विशेषताएँ एवं प्रमुख विचारक । मिशेल फूको की रचनाएँ तथा उत्तर-आधुनिकतावाद से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर हिंदी में पढ़ें।
🔹उत्तर आधुनिकतावाद क्या है ? इसकी परिभाषा।
( Post Modernism in Hindi)
🔹 विखंडनवाद
🔹उत्तर-आधुनिकतावाद की मुख्य विशेषताएँ ।
🔹उत्तर आधुनिकतावाद के प्रमुख विचारक ।
🔹मिशेल फूकोल्ट की रचनाएं ।
🔹उत्तर आधुनिकतावाद से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ।
उत्तर आधुनिकतावाद क्या है इसकी परिभाषा:
( Post Modernism in Hindi)
उत्तर आधुनिकतावाद 20वीं सदी में होने वाला एक सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, एवं दार्शनिक आंदोलन है। 1967 ई. में जान बॉर्थ ने ' द लिटरेचर ऑफ एक्सेशन ' में उत्तर आधुनिकतावाद का प्रयोग कला के संदर्भ में किया था । और बाद में ' द लिटरेचर ऑफ रिप्लेनिशमेंट ' में इसे विस्तार दिया था ,इसी के बाद यह प्रचलन में आया।
🔹 मिशेल फूकोल्ट उत्तर आधुनिकवादी, उत्तर संरचनावादी एवं मार्क्सवादी विचारक हैं। यह किसी भी प्रकार की व्यवस्था का विरोध करते है । क्योंकि इसके अनुसार पहले व्यक्ति के लिए एक व्यवस्था का निर्माण किया गया तथा फिर उसी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सजा की व्यवस्था की गई । उनके अनुसार जब लोगों को सुधारने के लिए जेल का आविष्कार किया गया, तो उसके उपरांत अपराधों में कमी आनी चाहिए थी, जबकि ऐसा नहीं हुआ बल्कि अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी हुई । उनके अनुसार जेल का प्रयोग व्यक्तियों की आवाज को अनुशासन के नाम पर दबाने के लिए किया जाने लगा तथा क्रांति की आवाज को कमजोर बना दिया गया ।
मिशेल फूकोल्ट पूंजीवादी-उदारवादी व्यवस्था को समाप्त करना चाहते हैं, क्योंकि पूंजीवादी व्यवस्था ने व्यक्ति को स्व से अलग कर दिया । क्योंकि यह व्यवस्था शक्ति का आरोपण करती है, जिससे व्यक्ति की वैयक्तिकता एवं सृजन क्षमता समाप्त होती है । यह सत्य के सार्वभौमिक एवं निरपेक्ष स्वरूप को अस्वीकार करते हैं ।
🔹 उत्तर आधुनिकतावाद के प्रमुख प्रतिपादकों में गिलीज डेल्यूज, जीन फ्रेंकोइस ल्योटार्ड, मिशेल फूकोल्ट एवं जैक्स देरिदा हैं।
🔹 विखंडनवाद (Deconstruction) :
उत्तर आधुनिकतावाद का मूल आधार जैक्स देरिदा का विखंडनवाद है। देरिदा ने ' ऑफ ग्रामेटोलॉजी'(1967) में अपने विचार व्यक्त किया । उनके अनुसार पाठक पाठ्य- पुस्तक का अर्थ व्यक्तिगत रूप में विश्लेषित करेगा, लेखक की दृष्टिकोण को स्वीकार करना आवश्यक नहीं है। उनके अनुसार पाठ (text) से ज्यादा संदर्भ (context) महत्वपूर्ण है।
🔹 उत्तर आधुनिकतावादी बहुलवाद और अनिश्चितता को स्वीकार करते हैं । ये किसी भी सार्वभौमिक सत्य को स्वीकार नहीं करते,जैसे कि उदारवादी और मार्क्सवादी करते हैं। यह असहमति, सहिष्णुता तथा मतभेद को स्वीकार करते हैं उनके अनुसार प्रत्येक वस्तु , समय और संदर्भ के अनुसार निर्धारित होती है । इन्होंने आधुनिक विचारधाराओं के विश्व को समझने के सार्वभौमिक तरीकों को अस्वीकृत कर दिया ।
🔹 आधुनिक उदारवादी विचारकों का मानना है कि उनके विचार निरपेक्ष हैं ,परंतु उत्तर आधुनिक विचारधारा इसका खंडन करती है, उनका मानना है कि ज्ञान सार्वभौमिक नहीं बल्कि विखंडित होता है तथा वह समाज व संस्कृति पर आधारित होता है । उनके अनुसार ज्ञान पूर्ण सत्य नहीं बल्कि उस व्यक्ति पर निर्भर करता है जो उसे वस्तु के बारे में सोच रहा हो तथा उसे देख रहा हो । यह ज्ञान को वस्तुनिष्ठ नहीं बल्कि आत्मनिष्ठ मानते हैं ।
उत्तर-आधुनिकतावाद की मुख्य विशेषताएँ :
1. महान आख्यानों (Meta-narratives) का खंडन
उत्तर-आधुनिकतावाद के प्रमुख विचारक ल्योटार्ड के अनुसार मार्क्सवाद, उदारवाद, राष्ट्रीयता, विज्ञान आदि मनुष्य पर प्रभुत्व जमाते हैं, इसलिए इनकी सार्वभौमिकता को अस्वीकार करना चाहिए। क्योंकि कंप्यूटर , आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के वर्तमान समय में विचारों को वस्तुनिष्ठ बनाने की होड है जो मूलतः आत्मनिष्ठ हैं।
2. उत्तर आधुनिकतावाद के अनुसार सत्य परिस्थितियों, संस्कृति, भाषा और सत्ता की संरचनाओं पर निर्भर होता है। कोई भी सत्य पूर्ण या सार्वभौमिक नहीं होता ।
3. उत्तर आधुनिकतावाद बहुसंस्कृतिवाद और विविधता का समर्थन करता है। यह अल्पसंख्यकों, हाशियाकृत समूहों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों की आवाज को महत्व देता है।
4. इसके अनुसार साहित्य में एक ही पाठ को विभिन्न पाठकों द्वारा अनेक तरीकों से पढ़ा/समझा जा सकता है। लेखक का आशय अंतिम नहीं होता। इस दृष्टिकोण को विखंडनवाद (Deconstruction) कहते हैं , जिसके प्रमुख विचारक जैक्स डेरीदा (Jacques Derrida) हैं।
5. इनके अनुसार भाषा वास्तविकता को नहीं दर्शाती, बल्कि वास्तविकता को निर्मित करती है।
6. उत्तर आधुनिकतावाद मानव, ईश्वर, विज्ञान या तर्क किसी को भी अंतिम आधार नहीं मानता। फूकोल्ट ने शक्ति को ज्ञान के रूप में परिभाषित किया ,उसके अनुसार शक्ति का कोई केंद्र नहीं होता । शक्तियां समाज में बिखरी रहती हैं। इनका प्रवाह शरीर में कोशिकाओं के समान नीचे से ऊपर की ओर होता है ।
7. डॉ अमरनाथ सिन्हा के अनुसार - “एक व्यापक दृष्टिकोण से उत्तर आधुनिकता के 3 केंद्रीय तत्त्व हैं- पहला
समग्रतावादी सार्वभौमिक सत्य को नकारना , दूसरा तर्कवाद को नकारना और तीसरा आधुनिकतावाद की सक्षमता को नकारना ।
👉 उत्तर आधुनिकतावाद का जनक जीन फ्रेंकोइस ल्योटार्ड को माना जाता है । क्योंकि उनकी प्रसिद्ध पुस्तक The Postmodern Condition (1979)
ने उत्तर-आधुनिकतावाद को एक स्पष्ट दार्शनिक रूप दिया।
उत्तर आधुनिकतावाद के प्रमुख विचारक :
Michel Foucault – सत्ता/ज्ञान, विमर्श
Jacques Derrida – विखंडन
Jean Baudrillard – सिमुलेशन, हाइपररियलिटी
Jean-François Lyotard – महान आख्यानों की अस्वीकृति
मिशेल फूकोल्ट की रचनाएं:
Madness and civilization (1961)
The order of things (1966)
Discipline and punish (1975)
The history of sexuality (1976)
उत्तर आधुनिकतावाद से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर:
1. उत्तर आधुनिकतावाद क्या है?
उत्तर: उत्तर आधुनिकतावाद एक बौद्धिक एवं वैचारिक दृष्टिकोण है जो आधुनिकतावाद की सार्वभौमिकता, तर्कवाद और “महान आख्यानों” (Grand Narratives) को चुनौती देता है। यह सत्य, ज्ञान और सत्ता को सापेक्ष एवं विमर्श-निर्मित मानता है।
2. “महान आख्यान” से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: महान आख्यान वे व्यापक सिद्धांत हैं जो इतिहास, समाज और राजनीति को एक ही सार्वभौमिक सत्य से समझाने का दावा करते हैं, जैसे—प्रगति, राष्ट्र-राज्य, मार्क्सवाद, उदारवाद।
3. राजनीति विज्ञान में उत्तर आधुनिकतावाद का महत्व क्या है?
उत्तर: यह राज्य-केंद्रित विश्लेषण से हटकर सत्ता, भाषा, विमर्श, पहचान और संस्कृति के माध्यम से राजनीति को समझने पर बल देता है।
4. उत्तर आधुनिकतावाद के प्रमुख विचारक कौन हैं?
उत्तर:
मिशेल फूको (Michel Foucault)
जैक डेरिडा (Jacques Derrida)
जाँ फ्रांसुआ लियोतार (Jean-François Lyotard)
जाँ बॉद्रियार (Jean Baudrillard)
5. मिशेल फूको का “सत्ता–ज्ञान” सिद्धांत क्या है?
उत्तर: फूको के अनुसार सत्ता और ज्ञान अलग नहीं हैं; सत्ता ज्ञान को उत्पन्न करती है और ज्ञान सत्ता को बनाए रखता है। सत्ता हर स्तर पर फैली होती है।
6. विखंडन (Deconstruction) से क्या आशय है?
उत्तर:विखंडन जैक डेरिडा की अवधारणा है, जिसके अनुसार किसी भी पाठ या विचार का कोई स्थायी अर्थ नहीं होता; अर्थ संदर्भ और भाषा पर निर्भर करता है।
7. उत्तर आधुनिकतावाद और आधुनिकतावाद में अंतर बताइए।
उत्तर: आधुनिकतावाद सार्वभौमिक सत्य, तर्क और प्रगति पर विश्वास करता है, जबकि उत्तर आधुनिकतावाद सापेक्षता, बहुलता और विखंडन पर बल देता है।
8. पहचान की राजनीति क्या है?
उत्तर:ऐसी राजनीति जिसमें जाति, लिंग, नस्ल, धर्म, लैंगिक पहचान आदि को राजनीतिक विश्लेषण का केंद्र बनाया जाता है।
9. उत्तर आधुनिकतावाद की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
सत्य की सापेक्षता
महान आख्यानों का विरोध
भाषा और विमर्श की केंद्रीय भूमिका
सत्ता का विकेंद्रीकरण
बहुलतावाद
10. उत्तर आधुनिकतावाद की प्रमुख आलोचनाएँ क्या हैं?
उत्तर:
अतिसापेक्षतावाद
नैतिक मानकों की कमी
व्यावहारिक नीति-निर्देशन में असमर्थता
अस्पष्टता और दुरूहता
11. उत्तर आधुनिकतावाद का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: इसने लोकतंत्र को केवल संस्थाओं तक सीमित न रखकर विमर्श, मीडिया, अल्पसंख्यक आवाज़ों और नागरिक पहचान से जोड़ा।
12. क्या उत्तर आधुनिकतावाद किसी विचारधारा का समर्थन करता है?
उत्तर: नहीं, यह किसी एक विचारधारा का समर्थन नहीं करता, बल्कि सभी स्थापित विचारधाराओं पर प्रश्न उठाता है।
13. उत्तर आधुनिकतावाद और उत्तर-औपनिवेशिक चिंतन में संबंध बताइए।
उत्तर: दोनों ही पश्चिमी सार्वभौमिक दावों का विरोध करते हैं और स्थानीय अनुभवों, पहचान और वैकल्पिक इतिहासों पर बल देते हैं।
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