कन्फ्यूशियस कौन थे? उनके राजनीतिक विचार, नैतिक दर्शन, मानव स्वभाव संबंधी सिद्धांत, प्रमुख रचनाएँ और JRF Political Science के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर जानें। Confucianism को सरल भाषा में समझें।
🔹 कन्फ्यूशियस कौन थे ?
🔹 कन्फ्यूशियस के विचार
🔹कन्फ्यूशियस का राजनीतिक विचार ( Confucius political thought in Hindi)
🔹 कन्फ्यूशियस का मानव स्वभाव संबंधी विचार
🔹कन्फ्यूशियस की आलोचना
🔹रचनाएं
🔹महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
कन्फ्यूशियस कौन थे ?
कन्फ्यूशियस प्राचीन चीन में जन्मे एक शिक्षक, राजनीतिक और दार्शनिक थे । इनका पूरा नाम ' कोंग क्यू कन्फ्यूशियस ' था। इनका जन्म 551 ईसा पूर्व नेक्सिनजियान (चीन) में हुआ था । इनके विचार मुख्यतः नैतिकता, सदाचार, दार्शनिकता व व्यवस्थित समाज पर जोर देते हैं। इनके विचारों को कन्फ्यूशियसवाद (confusianism) कहा जाता है। इनके विचारों ने चीन की संस्कृति एवं सभ्यता को अत्यधिक प्रभावित किया। इन्होंने कन्फ्यूशियस धर्म की स्थापना की इसलिए इन्हें कन्फ्यूशियस धर्म का संस्थापक कहा जाता है ।
कन्फ्यूशियस के विचार :
कन्फ्यूशियस के विचारों को कन्फ्यूशियसवाद कहा जाता है। इनके विचारों में हीगल की झलक दिखती है । इन्होंने चीन की व्यवस्था में सुधार लाने,शांति व एकता स्थापित करने एवं एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने का प्रयास किया। इनके अनुसार आदर्श व्यवस्था में समाज में चार वर्ण होने चाहिए, अर्थात ये वर्ण व्यवस्था का समर्थन करते है ,परंतु वर्ण व्यवस्था में कठोरता के समर्थक नहीं हैं।
🔹 नैतिकता: ये नैतिकता का पूर्ण समर्थन करते हैं, इनके अनुसार शिक्षा सबके लिए समान होना चाहिए। किन्तु राजनीतिक, सामाजिक व प्रशासनिक अधिकार सिर्फ पुरुषों को ही मिलने चाहिए । नैतिकता के संबंध में इनके विचार अरस्तू से मेल खाते हैं, क्योंकि अरस्तू के समान ही इन्होंने माना कि सरकार को सामाजिक परंपराओं को ध्यान में रखकर कानून बनाना चाहिए। इनके अनुसार विकास का कार्य नैतिकता के आधार पर होना चाहिए जिससे व्यक्ति स्व अनुशासित हो जाएंगे,एवं एक अच्छे राज्य का निर्माण होगा। व्यक्ति को नैतिक नियमों से शासित व नियमित किया जाना चाहिए। जोकि प्लेटो ने भी अपनी पुस्तक रिपब्लिक में कहा है।
🔹 कन्फ्यूशियस का राजनीतिक विचार :
कन्फ्यूशियस परंपरावादी नहीं है अपितु परंपराओं से सीख कर एक नई व्यवस्था के निर्माण पर बल देते हैं । कन्फ्यूशियस के अनुसार आम व्यक्ति इतने समर्थ नहीं है, कि वह अपने शासक का चयन कर सकें या स्वशासन कर सकें अर्थात व लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते । उनके अनुसार सभी व्यक्ति इतने समर्थ नहीं होते कि अपने लिए सही निर्णय ले सके । वह शैक्षिक समानता की बात तो करते हैं, परंतु सभी को समान अधिकार दिए जाने के समर्थन में नहीं है ।
प्लेटो की तरह कन्फ्यूशियस भी सदगुणी राजा को सारी शक्तियां सौपना चाहते हैं ,लेकिन कौटिल्य की तरह राजा पर कुछ नियंत्रण भी लगाते हैं । उनके अनुसार राजा को हमेशा सत्य बोलना चाहिए एवं ईमानदार होना चाहिए । यदि शासक अच्छे से नेतृत्व करता है तो सभी व्यक्ति इस के अनुसार कार्य करेंगे और उसका अनुसरण करेंगे । उनके अनुसार शासन जनता के हितों को ध्यान में रखकर चलना चाहिए । राजा को अपने निर्णय लेते समय सभी सम्मानित व्यक्तियों से सलाह लेनी चाहिए । सभी व्यक्तियों को अपने पद के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए, जैसे राजा को राजा जैसे आचरण , मंत्री को मंत्री जैसे एवं पिता को पिता जैसे व्यवहार करना चाहिए।
🔹 कन्फ्यूशियस का मानव स्वभाव संबंधी विचार :
कन्फ्यूशियस के अनुसार मानव स्वभाव से अच्छा होता है उसे सिखाया जा सकता है एवं प्रशिक्षित करके संपूर्ण बनाया जा सकता है । मानव एक सामाजिक एवं नैतिक प्राणी है, उसे नैतिकता सिखाई जा सकती है । वह शिक्षा को राजनीतिक सुधार का मुख्य साधन मानते हैं । इसलिए शिक्षा पर अत्यधिक जोर देते हैं ।
उनके अनुसार नैतिक जीवन जीने के लिए 5 चीजे बहुत आवश्यक है।
1. मन में दूसरे के लिए हित की भावना ।
2. व्यक्ति का न्याय प्रिय रहना ।
3. ईमानदार रहना ।
4. सही परंपराओं का पालन करना ।
5. ज्ञान की तलाश करना ।
कन्फ्यूशियस की आलोचना:
कन्फ्यूशियस की आलोचना इस आधार पर की गई कि उन्होंने लोकतंत्र और समानता का विरोध किया जो कि अनुचित है । वह सभी व्यक्तियों को समान अधिकार नहीं देते जिससे वर्ग-प्रभुत्व की भावना दिखाई देती है । वह केवल पुरुषों को प्रशासनिक,सामाजिक व राजनीतिक अधिकार देने की समर्थक है जो की महिला विरोधी विचार है ।
रचनाएं :
Book of Documents
Book of Rites
Confusious says
Classic of poetry
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :
1. कन्फ्यूशियस किस दर्शन के संस्थापक माने जाते हैं?
उत्तर: कन्फ्यूशियस कन्फ्यूशियसवाद (Confucianism) के संस्थापक हैं, जो नैतिकता, सदाचार और सामाजिक अनुशासन पर आधारित दर्शन है।
2. कन्फ्यूशियस की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक/स्रोत कौन सा है?
उत्तर: The Analects (Lunyu) ,जिसे उनके शिष्यों ने उनके कथनों और संवादों के आधार पर तैयार किया।
3. कन्फ्यूशियस किस प्रकार के शासन का समर्थन करते हैं?
उत्तर: नैतिक शासन (Moral Government) , जहां शासक सदाचार, दया और नैतिकता के आधार पर राज्य चलाये।
4. कन्फ्यूशियस के अनुसार आदर्श शासक कैसा होना चाहिए?
उत्तर: श्रेष्ठ या योग्य पुरुष—जो नैतिक, ईमानदार, विद्वान, करुणाशील और जनता का हितैषी हो,तथा जनता के हितों को ध्यान में रखकर कानून का निर्माण करे।
5. कन्फ्यूशियस कानून (Legalism) के बजाय किसके उपयोग पर जोर देते हैं?
उत्तर: नैतिकता (Virtue) उनका विश्वास था कि केवल दंड से समाज नहीं सुधरता, बल्कि नेता का आदर्श आचरण जनता को प्रेरित करता है।
6. कन्फ्यूशियस के अनुसार सामाजिक अव्यवस्था का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: लोग दायित्वों और भूमिकाओं का पालन नहीं करते, जिससे सामाजिक और राजनीतिक अव्यवस्था पैदा होती है।
7. कन्फ्यूशियस शिक्षा को क्यों महत्वपूर्ण मानते थे?
उत्तर: शिक्षा से व्यक्ति नैतिक, उत्तरदायी और कर्तव्यनिष्ठ बनता है। यह समाज और शासन दोनों के सुधार का मुख्य साधन है।
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