प्लेटो कौन थे ? प्लेटो का जीवन परिचय, प्रमुख रचनाएँ, आदर्श राज्य, न्याय सिद्धांत, शिक्षा सिद्धांत और आलोचना—Plato Philosophy को सरल भाषा में विस्तार से जानें।
🔹प्लेटो कौन थे ? प्लेटो का जीवन परिचय ।
🔹प्लेटो की रचनाएं ।
🔹प्लेटो का व्यक्ति के संबंध में विचार ।
🔹प्लेटो का आदर्श राज्य का विचार ।
🔹प्लेटो का न्याय सिद्धांत ।
🔹प्लेटो का शिक्षा सिद्धांत ।
🔹प्लेटो की आलोचना ।
🔹प्लेटो से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ।
प्लेटो कौन थे ? प्लेटो का जीवन परिचय
प्लेटो प्राचीन यूनानी राजनीतिक दार्शनिक है , जिसे प्राचीन राजनीतिक दर्शन का पिता माना जाता है । प्लेटो का जन्म 427 ईसा पूर्व एथेंस (यूनान ) में हुआ था । इनका वास्तविक नाम ' एरिस्टोक्लीज' था, सुकरात ने इन्हें प्लेटो की उपाधि दी । प्लेटो के गुरु का नाम सुकरात एवं शिष्य का नाम अरस्तु है ।
प्लेटो की सबसे महत्वपूर्ण रचना ' The Republic ' है । प्लेटो की अध्ययन पद्धति दार्शनिक या निगमनात्मक है। उन्होंने राजनीति शास्त्र को नैतिकता का एक भाग माना है । उन्होंने अपनी रचना स्टेट्समैन(Statesman) में
' सर्वोत्तम संभावित राज्य' का उल्लेख किया है । इसमें वह कानून के शासन की बात करते हैं ।
सुकरात के विचारों ने प्लेटो के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। सुकरात की मृत्यु (399 ईसा पूर्व) ने प्लेटो को नैतिकता, न्याय और अच्छे राज्य के बारे में गंभीर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया।
प्लेटो ने अपनी गुरु सुकरात की मृत्यु के पश्चात अकादमी (Academy) नामक विद्यालय की स्थापना 386 ई. पू. में की ,जो कि पश्चिमी दुनिया का सबसे उच्च शिक्षण संस्थान था । Academy मे प्रवेश के लिए गणित का ज्ञान आवश्यक था।
प्लेटो की रचनाएं:
प्लेटो के सभी ग्रन्थ संवाद शैली में लिखे गए हैं।
The Republic – राजनीतिक दर्शन
The Statesman - ' सर्वोत्तम संभावित राज्य'
Symposium – प्रेम का दर्शन
Apology – सोक्रेटीस का बचाव
The Laws - कानून या विधि
Phaedo – आत्मा और मृत्यु
Meno – ज्ञान
Timaeus – ब्रह्मांड
Crito - सुकरात को दिए गए विष के दौरान का वार्तालाप।
प्लेटो का व्यक्ति के संबंध में विचार :
प्लेटो के अनुसार , आत्मा ही व्यक्ति की पहचान है। हर आत्मा में तीन प्रकार के गुण पाए जाते हैं , विवेक, साहस और तृष्णा। इन्हीं तीन गुणों से समाज में तीन वर्गों का निर्माण हुआ है ।
बुद्धि या विवेक - शासक वर्ग (दार्शनिक राजा)
साहस या धैर्य - सैनिक वर्ग
संयम - उत्पादक या श्रमिक वर्ग ।
🔹 प्लेटो राज्य व समाज में अंतर नहीं करता , वह इसे तीनों वर्गों का समूह मानता है। उसके अनुसार प्रत्येक वर्ग को अपनी आत्मा के गुण के अनुसार कार्य करना चाहिए ।
वर्गों के निर्धारण के लिए प्लेटो शिक्षा व्यवस्था की बात करता है । प्लेटो के अनुसार राजा को सामाजिकता से दूर रहना चाहिए एवं शिक्षा तथा साम्यवाद द्वारा राज्य की स्थापना किया जाना चाहिए जिससे राज्य न्यायपूर्ण होगा ।
प्लेटो का आदर्श राज्य का विचार :
( Plato's idea of ideal state in Hindi)
प्लेटो अपनी पुस्तक The Republic में आदर्श राज्य की व्याख्या करता है । उसके अनुसार राज्य का निर्माण ओक के वृक्ष से नहीं, अपितु व्यक्तियों के चरित्र से होता है । उनके अनुसार राज्य का मुख्य उद्देश्य न्याय, नैतिकता और लोगों का कल्याण होना चाहिए।
राज्य एक प्राकृतिक संस्था है ,यह विकास का परिणाम है । प्लेटो के अनुसार राज्य नैतिक है और राज्य नैतिक इसलिए है क्योंकि वह एक दार्शनिक राजा द्वारा शासित होता है । और वह वास्तविकता को देखता है । प्लेटो की यह शासन प्रणाली ' विवेकशील अधिनायकवाद ' कहलाती है । प्लेटो के आदर्श राज्य में विधि और दंड को कोई स्थान नहीं दिया गया।
प्लेटो के अनुसार राज्य व्यक्तियों के तीन वर्गों से मिलकर बना है , विवेकशील अर्थात दार्शनिक राजा, साहसी अर्थात सैनिक वर्ग और उत्पादक अर्थात श्रमिक वर्ग। इन तीनों वर्गों से मिलकर न्यायपूर्ण राज्य का निर्माण होता है ।
प्लेटो का न्याय सिद्धांत:
(Plato's idea of justice in hindi )
प्लेटो के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपना-अपना हक दिलाना ही न्याय है । उनके अनुसार न्याय सिद्धांत ,व्यक्ति की आत्मा का गुण है । प्लेटो तात्कालिक यूनानी समाज में प्रचलित न्याय सिद्धांत का खंडन करता है , जिसका प्रतिपादन सोफिस्ट, पोलीमार्कस , थ्रेसीमैक्स, ग्लूकोन ने किया था । प्लेटो ने अपनी पुस्तक रिपब्लिक में न्याय की सोफिस्ट की धारणा का पूर्ण रूप से खंडन किया ।
🔹 सोफिस्ट मूलतः भौतिकवादी और उपयोगिता वादी विचारक थे । सोफिस्टिक विचारकों में काफ़िलास के अनुसार सत्य बोलना व ऋण चुकाना ही न्याय है । प्लेटो ने इसका खंडन किया । प्लेटो के अनुसार सत्य का पूर्ण ज्ञान परंपराओं व प्रथाओं से प्राप्त नहीं होता , लेकिन प्रत्येक परिस्थिति में सत्य बोलना न्यायपूर्ण नहीं होता।
🔹 पालीमार्कस के अनुसार, शत्रु के साथ शत्रुता एवं मित्र के साथ मित्रता ही न्याय है , परंतु प्लेटों के अनुसार न्याय की संकल्पना व्यक्तिवादी चिंतन पर आधारित है जिसमें व्यक्ति अपने स्वार्थ के आधार पर कार्य करते हैं । प्लेटो के अनुसार , स्वार्थ के आधार पर कार्य करना न्याय नहीं है जबकि अपने नैतिक दायित्वों का पालन करना ही न्याय है ।
🔹 थ्रेसीमैक्स के अनुसार , शक्तिशाली व्यक्ति का हित ही न्याय है, अतः शासकों का स्वार्थ एवं भलाई ही न्याय है । परंतु प्लेटो के अनुसार समूचे समाज की भलाई ही न्याय है, किसी व्यक्ति विशेष या वर्ग मात्र की नहीं।
🔹प्लेटो के अनुसार शक्तिशाली व्यक्ति की बजाय , न्यायपूर्ण व्यक्ति का महत्व ज्यादा है । प्लेटो ने ग्लूकोन के न्याय की मान्यता का खंडन करते हुए कहा कि न्याय बाह्य नहीं, बल्कि आंतरिक होता है । यह कृत्रिम रूप में निर्मित नहीं हो सकता। उनके अनुसार न्याय के दो पहलू है।
(i) वैयक्तिक स्तर पर न्याय :
आत्मा के तीनों गुणों में सामंजस्य ही न्याय है ।
(ii) सामाजिक स्तर पर न्याय :
समाज के तीनों वर्गों द्वारा अपने कर्तव्यों का निष्पादन करना तथा दूसरे के कार्य में हस्तक्षेप न करना ।
🔹प्लेटो का न्याय कर्तव्य पर आधारित है , जबकि आधुनिक न्याय की संकल्पना अधिकारों पर आधारित है। प्लेटो का न्याय नैतिकता से परिचालित है,जबकि आधुनिक न्याय विधि द्वारा परिचालित है। प्लेटो के विचार में स्वतंत्रता, समानता या अधिकार की कोई संकल्पना नहीं है।
प्लेटो का शिक्षा सिद्धांत : (Plato’s Theory of Education)
प्लेटो ने शिक्षा का उद्देश्य बताते हुए कहा कि, अज्ञान से ज्ञान तथा अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा ही शिक्षा है। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य विचारों एवं आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना है। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है जो न्यायपूर्ण, अनुशासित व कर्तव्यनिष्ठ हो। तथा इसका उद्देश्य राज्य का लिए योग्य वर्गों का निर्माण करना है।
🔹 बार्कर के अनुसार प्लेटो की शिक्षा प्रणाली उसके न्याय सिद्धांत का तार्किक परिणाम है । रूसो ने The Republic को शिक्षा पर लिखा गया सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ माना ।
🔹 शिक्षा के चरण : (i) प्राथमिक शिक्षा तो 10 वर्ष से 20 वर्ष तक होगी इसमें संगीत एवं व्यायाम की शिक्षा मुख्य रूप में दी जाएगी ।
(ii) द्वितीय चरण की शिक्षा 20 वर्ष से 30 वर्ष की बीच होगी जिसमें गणित, ज्योतिषी तथा ज्यामिति की शिक्षा दी जाएगी ।
(iii) तृतीय चरण की शिक्षा 30 से 35 वर्ष के बीच होगी जिसमें दर्शनशास्त्र की शिक्षा दी जाएगी।
🔹 प्लेटो के अनुसार जो शिक्षा की प्रथम चरण में असफल होगा, उसे उत्पादन का कार्य सौंपा जाएगा । जो शिक्षा के द्वितीय चरण में असफल होगा, उसे सैनिकों का कार्य सौंपा जाएगा। जो शिक्षा के सभी चरण में सफल होगा वह दार्शनिक राजा होगा , उसे 35 वर्षों की शिक्षा के बाद 15 वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्लेटो के राज्य को एक विश्वविद्यालय कहा गया ,जो शिक्षा प्रदान करने की संस्था है।
प्लेटो की आलोचना :
कार्ल पापर ने अपनी रचना ' The Open society and its Enemies (1945) ' में प्लेटो को मुक्त समाज का शत्रु कहा है। उनके अनुसार प्लेटो, हीगल और मार्क्स मुक्त समाज के शत्रु हैं। इसलिए प्लेटो को ' सर्वाधिकारवाद का दार्शनिक प्रणेता ' कहा जाता है । मैक्सी ने प्लेटो को पहला कल्पनालोकीय विचारक कहा । हन्ना आरेंट ने भी प्लेटो को फासीवाद का दार्शनिक प्रेरक कहा । क्योंकि प्लेटो व फासीवाद दोनों राज्य को नैतिक व सर्वशक्तिमान संस्था मानते हैं। दोनों लोकतंत्र का घोर विरोध करते हैं।
प्लेटो से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर:
1. प्लेटो कौन थे?
उत्तर: प्लेटो प्राचीन यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक थे, जिन्हें पश्चिमी राजनीतिक दर्शन का पिता कहा जाता है। वे सुकरात के शिष्य और अरस्तू के गुरु थे।
2. प्लेटो का वास्तविक नाम क्या था?
उत्तर: प्लेटो का वास्तविक नाम एरिस्टोक्लीज (Aristocles) था।
3. प्लेटो की प्रमुख रचनाएँ कौन–कौन सी हैं?
उत्तर:
The Republic
Statesman
Symposium
The Laws
Apology
Phaedo
Crito
Meno
Timaeus
4. प्लेटो की सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक कौन सी है?
उत्तर: प्लेटो की सबसे प्रसिद्ध रचना "The Republic" है।
5. प्लेटो ने कौन सा शिक्षण संस्थान स्थापित किया था?
उत्तर: प्लेटो ने Academy की स्थापना की थी, जो पश्चिमी दुनिया का पहला उच्च शिक्षण संस्थान माना जाता है।
6. प्लेटो के शिक्षक और शिष्य कौन थे?
उत्तर:
गुरु: सुकरात
शिष्य: अरस्तु
7. प्लेटो के अनुसार आदर्श राज्य कैसा होना चाहिए?
उत्तर: प्लेटो के अनुसार आदर्श राज्य वह है जहाँ दार्शनिक राजा शासन करे, समाज के तीन वर्ग (शासक, सैनिक, उत्पादक) अपना-अपना कर्तव्य निभाएँ और न्याय स्थापित हो।
8. प्लेटो के अनुसार न्याय क्या है?
उत्तर: प्लेटो के अनुसार व्यक्ति और राज्य दोनों स्तर पर जब हर वर्ग/तत्व अपना-अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाता है और दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करता—उसी को न्याय कहते हैं।
9. प्लेटो आत्मा के कितने भाग बताते हैं?
उत्तर: प्लेटो आत्मा के तीन भाग बताते हैं—
1. विवेक (Reason)
2. साहस (Spirit)
3. तृष्णा (Desire)
10. प्लेटो के अनुसार राज्य में कितने वर्ग होते हैं?
उत्तर: तीन वर्ग—
शासक (दार्शनिक राजा)
सैनिक
उत्पादक
11. प्लेटो की शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: ऐसे अनुशासित, नैतिक और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक तैयार करना जो राज्य के लिए उपयोगी हों और सत्य-ज्ञान प्राप्त कर सकें।
12. प्लेटो की शिक्षा के मुख्य चरण कौन से थे?
उत्तर:
10–20 वर्ष: संगीत व व्यायाम
20–30 वर्ष: गणितीय शिक्षा
30–35 वर्ष: दर्शन
इसके बाद 15 वर्ष का प्रशासनिक प्रशिक्षण।
13. प्लेटो दार्शनिक राजा की संकल्पना क्यों देते हैं?
उत्तर: क्योंकि दार्शनिक सत्य का ज्ञान रखते हैं और लोभ, व्यक्तिगत स्वार्थ व भावनाओं से ऊपर उठकर शासन कर सकते हैं।
14. प्लेटो ने "गुफा रूपक" (Allegory of Cave) का उपयोग किसके लिए किया?
उत्तर: यह ज्ञान, सत्य और अज्ञान से मुक्ति की प्रक्रिया को समझाने के लिए प्रयोग किया गया रूपक है।
15. प्लेटो लोकतंत्र की आलोचना क्यों करते हैं?
उत्तर: प्लेटो के अनुसार लोकतंत्र में अज्ञान, भावनाएँ और स्वार्थ शासन को निर्देशित करते हैं, जिससे अव्यवस्था उत्पन्न होती है ।
16. प्लेटो को किस विचारधारा का प्रेरक कहा जाता है?
उत्तर: प्लेटो को सर्वाधिकारवाद (Totalitarianism) की दार्शनिक प्रेरणा देने वाला माना गया है, जैसे कार्ल पापर ने भी कहा
17. प्लेटो के न्याय सिद्धांत की प्रमुख आलोचना किसने की?
उत्तर: कार्ल पापर, हन्ना आरेंट और मैकियावेली जैसे विचारकों ने प्लेटो के सिद्धांतों की आलोचना की।
18. प्लेटो के दर्शन का आधुनिक राजनीतिक विज्ञान पर क्या प्रभाव है?
उत्तर: राज्य, न्याय, शिक्षा, समाज, नैतिकता और शासन से जुड़े आधुनिक सिद्धांतों की जड़ें प्लेटो के विचारों में मिलती हैं। वे पश्चिमी दर्शन के सबसे प्रभावशाली दार्शनिकों में से एक हैं।
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