अरस्तू कौन थे? उनके जीवन परिचय, आदर्श राज्य, दासता, अनुकरण, नागरिकता, क्रांति व न्याय सिद्धांत और प्रमुख कृतियों का सरल व विस्तृत विश्लेषण।
( अरस्तू का दर्शन (Aristotle Philosophy in Hindi) ।
🔹अरस्तू (Aristotle) कौन थे? उनका जीवन परिचय
🔹अरस्तू का आदर्श राज्य
🔹अरस्तू का दासता सिद्धांत
🔹अरस्तू का अनुकरण सिद्धांत
🔹अरस्तू का नागरिकता सिद्धांत
🔹अरस्तू का क्रांति सिद्धांत
🔹अरस्तू का न्याय सिद्धांत
🔹अरस्तू की प्रमुख कृतियां
🔹संबंधित प्रश्नोत्तर
अरस्तू (Aristotle) कौन थे? उनका जीवन परिचय :
प्राचीन यूनान के प्रसिद्ध राजनीतिक दार्शनिकों में अरस्तू का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है। अरस्तू का जन्म 384 ई. पू. में यूनानी उपनिवेश थ्रेस में स्थित स्टागिरस (Stagirus) नामक जगह पर हुआ था। इनके पिता का नाम निकोमेखस था , जोकि मैसेडोनिया के राजा के निजी वैद्य थे। अरस्तू, महान प्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो का शिष्य एवं सिकंदर का गुरु था । उन्होंने सिकंदर को राजनीति, युद्धनीति और नैतिकता की शिक्षा दी।
अरस्तू को राजनीति विज्ञान का पिता कहा जाता है। उन्होंने ' Politics ' नामक प्रसिद्ध रचना लिखी। अरस्तू ने लीसियम नामक प्रसिद्ध संस्था 335 ई. पू. में खोली थी , जिसमें वह शिष्यों के साथ चर्चा करते थे। अरस्तू के द्वारा आगनात्मक, द्वंदात्मक, विश्लेषणात्मक, तुलनात्मक पद्धतियों का प्रयोग किया गया। 322 ई.पू. में 62 वर्ष की आयु में euboea , ग्रीस में उनकी मृत्यु हो गयी।
🔹अरस्तू की अध्ययन पद्धति को ' सौद्देश्यात्मक पद्धति ' कहा जाता है , उनके अनुसार किसी वस्तु का उद्देश्य पूर्व निर्धारित होता है । इस पद्धति में फल को इच्छा पहले की जाती है, जैसे बीज से पहले वृक्ष की कल्पना । अरस्तू ने इस पद्धति के अनुसार राज्य को व्यक्ति से पहले बताया ।
अरस्तू का आदर्श राज्य:
अरस्तू के अनुसार राज्य स्वाभाविक, प्राकृतिक या आंगिक संस्था है ,राज्य समुदायों का समुदाय है । उनके अनुसार व्यक्ति का पूर्ण नैतिक विकास राज्य में ही संभव है । अरस्तू राज्य के बिना व्यक्ति का अस्तित्व नहीं मानते,उनके अनुसार जो व्यक्ति राज्य में नहीं रहता,वह या तो पशु है या देवता।
उनके अनुसार राज्य एक नैतिक संगठन है जो आत्मनिर्भर एवं सर्वश्रेष्ठ है। अरस्तू के अनुसार एक आदर्श राज्य में निम्नलिखित विशेषताएं होना चाहिए।
🔹 शासन प्रणाली पोलिटी होना चाहिए।
🔹 राज्य की जनसंख्या न ज्यादा न ही कम होना चाहिए।
🔹 राज्य का आकार भी ज्यादा बड़ा या छोटा नहीं होना चाहिए।
🔹राज्य समुद्र के किनारे होना चाहिए।
🔹नागरिकों का चरित्र बुद्धिमान और साहसी दोनों का मिला जुला रूप होना चाहिए।
अरस्तू ने राज्य को व्यक्ति का पूर्वगामी कहा है , उसके अनुसार राज्य के अंतर्गत ही व्यक्ति का महत्व है, जिस तरह शरीर के अंगों से पहले व्यक्ति का बोध होता है,उसी प्रकार नागरिकों से पहले राज्य का बोध होता है।
अरस्तू ने अर्थशास्त्र के अध्ययन को घरेलू कार्यों के प्रबंध का अध्ययन कहा , उनके अनुसार जीवन का मुख्य उद्देश्य नैतिक और सदगुणी जीवनयापन है।
अरस्तू के अनुसार राजनीति:
अरस्तू के अनुसार मानवीय जीवन में दो पक्ष है , राजनीतिक व सामाजिक जीवन। उनके अनुसार व्यक्ति का राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है। व्यक्ति में भौतिक आवश्यकताएं होती हैं जोकि पशुओं से मिलती है, परंतु उनका नैतिक गुण ही है जो ईश्वर की विशेषता के समान है। इसलिए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का मुख्य उद्देश्य समाज का कल्याण है न कि व्यक्तिगत स्वार्थ। यह विचार प्लेटो के विचारों का ही परिणाम है।
अरस्तू का दासता सिद्धांत :
अरस्तू ने दास प्रथा का समर्थन किया ,उनके अनुसार जो विवेक शून्य व्यक्ति है वह दास है। उनके अनुसार दास मनुष्य की जीवित संपत्ति व परिवार का भाग होते हैं।
अरस्तू के अनुसार यह प्रकृति का नियम है कि श्रेष्ठ अधीन पर शासन करे, अतः दास प्रथा प्राकृतिक है। उनके अनुसार दास प्रथा, दास व मालिक दोनों के लिए उपयोगी है। क्योंकि मालिक के साथ रहकर दासों में भी नैतिकता का विकास हो जाता है।
अरस्तू ने दास में नैतिकता का विकास हो जाने पर उसे छोड़ देने का भी समर्थन किया । इसलिए बार्कर अरस्तू की दास प्रथा में मानवीयता का गुण देखते हैं।
अरस्तू के दास प्रथा की विशेषताएं:
अरस्तू का दास प्रथा का सिद्धांत आधुनिक दास प्रथा से भिन्न है, आधुनिक दास प्रथा 18वीं, 19वीं सदी में अफ्रीका में प्रचलित थी। जिसमें दासों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था , उन्हें खुले आम बेचा व खरीदा जाता था। परंतु अरस्तू के दास प्रथा में निम्नलिखित विशेषताएं हैं।
🔹 अरस्तू ने युद्धबंदियों को दास की श्रेणी में नहीं रखा।
🔹उनके अनुसार दास का बेटा दास होगा यह आवश्यक नहीं है , उसमें नैतिकता के विकास से उसे इस श्रेणी से मुक्त किया जा सकता है।
🔹उनके अनुसार दासों को उत्पादन के कार्यों में नहीं लगाया जाएगा, वह केवल घरेलू कार्यों में सहायता करेंगे। तथा उनके साथ मानवीय व मित्रतापूर्ण व्यवहार किया जाएगा।
अरस्तू का अनुकरण सिद्धांत :
अरस्तू का अनुकरण सिद्धांत (Mimesis Theory) उसकी काव्यशास्त्र (Poetics) का सबसे महत्वपूर्ण विचार है। सरल शब्दों में, अरस्तू मानते हैं कि साहित्य, कला और विशेष रूप से काव्य मनुष्य के जीवन, क्रियाओं और अनुभवों का “अनुकरण” (imitation) है। महान दार्शनिक प्लेटो ने साहित्य और कला को सत्य से अधिक दूर होने के कारण उसके महत्व को कम कर दिया था , परंतु अरस्तू के अनुसार कला वास्तविकता की नकल नहीं है बल्कि वास्तविकता को पुनर्रचित कर प्रस्तुत की गई रचना है। एक कलाकार सत्य को दिखाने के लिए जीवन की क्रियाओं, भावनाओं को कला के रूप में चित्रित करता है।
अरस्तू के अनुसार मनुष्य जन्म से सीखना, बोलना ,आचरण करना आदि किसी से सीखकर अनुकरण करता है। उनके अनुसार मनुष्य अनुकरण से आनंद की अनुभूति करता है। तथा यह अनुभूति वह कला के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
अरस्तू का नागरिकता सिद्धांत:
अरस्तू ने नागरिकता के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए,जिसे अरस्तू का नागरिकता सिद्धांत कहा जाता है, उनके अनुसार जो व्यक्ति शासन के कार्यों में भाग लेते है तथा अपना योगदान देते है , वहीं नागरिक हैं।
आधुनिक नागरिकता का मूल आधार अधिकार है, जन्म से या वहां निवास करने से प्राप्त हो जाती है, परंतु अरस्तू के अनुसार, महिलाओं , शिल्पी, बूढ़े व बच्चों , विदेशियों व दासों को नागरिकता नहीं मिलेगी । उनके अनुसार नागरिकता कर्तव्य पर आधारित है। नागरिकता का आधार नैतिकता का विकास है , जन्म या निवास के आधार पर नागरिकता नहीं प्राप्त होगी ।
🔹 अरस्तू के अनुसार, नागरिकों का एक सामान्य गुण नहीं होता , उनमें विभिन्न गुण पाए जाते है तथा राज्य के विधान के अनुसार उनमें भी परिवर्तन होता रहता है। एक अच्छे नागरिक में शासन करने तथा शासित होने की क्षमता होनी चाहिए।
🔹 अरस्तू के अनुसार, श्रेष्ठ मनुष्य के गुण संयम,साहस एवं न्याय आदि है । एक श्रेष्ठ मनुष्य में शासक व नागरिक दोनों के गुण होना चाहिए।
अरस्तू का क्रांति सिद्धांत :
अरस्तू के अनुसार , शासन प्रणाली या संविधान में परिवर्तन ही क्रांति है । क्रांति का मूल कारण विषमता या समानता की आकांक्षा है । उनके अनुसार समानता दो तरह की होती है ।
(i) निरपेक्ष समानता
(ii) आनुपातिक समानता
🔹अरस्तू के अनुसार क्रांति का मूल कारण गरीब वर्गों में समान होने की आकांक्षा है,तथा धनी वर्गों द्वारा विषमता बनाए रखना है । इसलिए क्रांति दोनों वर्गों द्वारा होती है।
🔹अरस्तू के अनुसार क्रांति करने के अन्य कारण भी होते हैं। जैसे - शासकों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार या लाभ की इच्छा, सम्मान की लालसा , शासन करने वाले व्यक्ति का अयोग्य होना , घृणा होना, समाज में धनी व गरीब वर्ग में असंतुलन आदि।
🔹 विशेष शासन प्रणालियों में क्रांति के विशेष कारण हैं जैसे- प्रजातंत्र में क्रांति तब होती है जब एक लोकप्रिय नेता आम जनता को धनी व्यक्तियों के प्रति भड़काए । अथवा लोकप्रिय नेता समूची शक्तियों को स्वयं प्राप्त करने का प्रयत्न करने लगे।
कुलीनतंत्र में क्रांति का मूल कारण शासन करने वाले व्यक्तियों की सीमित संख्या है । राजतंत्र में क्रांति का मूल कारण शासक वर्गों का आपसी मतभेद होना या जन आंदोलन नेता द्वारा शासन के विरुद्ध भावनाएं भड़काना है।
क्रांति रोकने के उपाय :
अरस्तू के अनुसार क्रांति रोकने का सबसे उपयुक्त साधन
'' मध्यम वर्ग का शासन" है । अरस्तू के विचारों में मध्यम मार्ग का विचार अधिक प्रभावी है ।
🔹जनता में अपने कानून का पालन वो उसके प्रति सम्मान की भावना हो ।
🔹 शासकों का जनता से ब्यौहार अच्छा हो।
🔹 समाज में अधिक विषमता ना हो।
🔹एक व्यक्ति या वर्ग आवश्यकता से अधिक संपत्ति अर्जित न कर सके।
🔹 सद्गुण से युक्त शिक्षा पद्धति अपनाया जाए।
🔹न्यायपूर्ण समाज की स्थापना हो , क्योंकि ऐसे समाज में क्रांति की भावना कम होती हैं।
🔹अरस्तू के अनुसार ,सार्वजनिक संपत्ति को किसी व्यक्ति द्वारा न हड़पा जाए।
अरस्तू का न्याय सिद्धांत :
अरस्तू का न्याय सिद्धांत समानुपातिक है, अरस्तू ने न्याय को दो भागों में विभाजित किया है ।
(i) संपूर्ण न्याय :
संपूर्ण न्याय से तात्पर्य सात्विकता (Righteousness) से है,अर्थात अपने कर्तव्यों का पालन ही न्याय है ।
(ii) विशेष न्याय :
संशोधनात्मक न्याय - कानून के अनुसार कार्य नहीं करने पर, व्यक्ति के आचरण को सुधारने के लिए राज्य के द्वारा दंड दिया जाना ।
वितरणात्मक न्याय - राज्य द्वारा व्यक्तियों में पद, सम्मान एवं पुरस्कार का वितरण करना ।
🔹अरस्तू के अनुसार समाज में सेवाओं और पदों का वितरण , व्यक्ति द्वारा समाज में लिए गए योगदान से निर्धारित होगा। अर्थात व्यक्ति का जिस अनुपात में समाज में योगदान हो उसी अनुपात में पुरस्कार मिलना चाहिए।
🔹अरस्तू के समानता का सिद्धांत भी समानुपातिक है।
अरस्तू की प्रमुख कृतियां:
अरस्तू ने कई महान ग्रंथ लिखे, जिनमें प्रमुख हैं:
Politics
Metaphysics
Athenian constitution
Nicomachean Ethics
Poetics
Physics
Rhetoric
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👉अरस्तू ने अपने गुरु प्लेटो के विपरीत विधि के शासन को अधिक महत्व दिया । उनके अनुसार विधि वासना रहित विवेक है, यह अनुभवों की संचित निधि है । अतः इसका शासन ही सर्वोत्तम है । अरस्तू ने अपनी रचना Politics में कहा कि जब व्यक्ति विधि व न्याय से परिपूर्ण होता है तो वह सर्वोत्तम होता है , उनके अनुसार विधि शासक व शासित दोनों पर लागू होता है । इस प्रकार अरस्तू ने विधि के शासन को अत्यधिक महत्व दिया।
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संबंधित प्रश्नोत्तर :
1. अरस्तू कौन थे?
अरस्तू प्राचीन यूनान के महान दार्शनिक, वैज्ञानिक और राजनीतिक चिंतक थे। उन्हें राजनीति विज्ञान का जनक कहा जाता है।
2. अरस्तू का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 384 ई.पू. में यूनानी नगर स्टागिरा में हुआ था।
3. अरस्तू के गुरु और प्रमुख शिष्य कौन थे?
गुरु – प्लेटो
प्रमुख शिष्य – सिकंदर महान (Alexander the Great)
4. अरस्तू को किस उपाधि से जाना जाता है?
उन्हें राजनीति विज्ञान का पिता (Father of Political Science) कहा जाता है।
5. अरस्तू का प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान कौन सा था?
उन्होंने लीसियम (Lyceum) की स्थापना की थी।
6. अरस्तू के अनुसार राज्य क्या है?
अरस्तू ने राज्य को प्राकृतिक, नैतिक और आंगिक संस्था कहा—"राज्य समुदायों का समुदाय है"।
7. अरस्तू के अनुसार आदर्श राज्य की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
शासन – पोलिटी (Polity)
जनसंख्या – न कम, न अधिक
नागरिक – बुद्धिमान एवं साहसी
राज्य – समुद्र के किनारे
राज्य – आत्मनिर्भर व नैतिक
8. अरस्तू ने किस प्रकार की पद्धति अपनाई?
उन्होंने सौद्देश्यात्मक पद्धति (Teleological Method) अपनाई।
9. अरस्तू का दासता सिद्धांत क्या है?
उन्होंने प्राकृतिक दासता का समर्थन किया। उनके अनुसार दास "जीवित संपत्ति" हैं और श्रेष्ठ का अधम पर शासन प्राकृतिक है।
हालांकि, वे दासों के नैतिक विकास के बाद उन्हें मुक्त करने का पक्ष भी लेते हैं।
10. अरस्तू का अनुकरण सिद्धांत (Mimesis Theory) क्या है?
कला और साहित्य जीवन का अनुकरण हैं। कलाकार वास्तविकता की नकल नहीं, बल्कि उसका पुनर्रचनात्मक चित्रण करता है।
11. अरस्तू के अनुसार नागरिक कौन है?
जो व्यक्ति शासन और प्रशासन में भाग लेता है, वही नागरिक है।
महिलाओं, दासों, बच्चों, कारीगरों और विदेशियों को नागरिकता नहीं दी जाती।
12. अरस्तू का क्रांति सिद्धांत क्या कहता है?
क्रांति = शासन प्रणाली या संविधान में परिवर्तन।
मुख्य कारण –
समानता की इच्छा (गरीब में)
विषमता बनाए रखना (धनी में)
भ्रष्टाचार
सम्मान की लालसा
अयोग्य शासक
क्रांति रोकने का श्रेष्ठ तरीका – मध्यम वर्ग का शासन।
13. अरस्तू ने किस प्रकार के न्याय की बात की?
दो प्रकार के न्याय—
1. संपूर्ण न्याय – कर्तव्य पालन ही न्याय है।
2. विशेष न्याय
संशोधनात्मक
वितरणात्मक (योगदान के अनुपात में पुरस्कार)
14. अरस्तू की प्रमुख कृतियां कौन सी हैं?
Politics
Nicomachean Ethics
Poetics
Metaphysics
Athenian Constitution
Physics
Rhetoric
15. अरस्तू के अनुसार शासन का सर्वोत्तम रूप क्या है?
उन्होंने विधि के शासन (Rule of Law) को सर्वोत्तम माना।
16. अरस्तू के अनुसार मनुष्य क्या है?
मनुष्य स्वभाव से राजनीतिक प्राणी है।
17. अरस्तू के अनुसार क्रांति को कैसे रोका जा सकता है?
मध्यम वर्ग मजबूत हो
न्यायपूर्ण समाज
संपत्ति में संतुलन
सद्गुणयुक्त शिक्षा
कानून का सम्मान
भ्रष्टाचार से दूर शासन
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