नव मार्क्सवाद क्या है ? प्रमुख विचारक,उत्पत्ति और इतिहास, आलोचनात्मक सिद्धांत। फ्रैंकफर्ट स्कूल के विचारक एवं उनकी मान्यताएं।

नव मार्क्सवाद क्या है ? प्रमुख विचारक,उत्पत्ति और इतिहास, आलोचनात्मक सिद्धांत। फ्रैंकफर्ट स्कूल के विचारक एवं उनकी मान्यताएं।



🔹नव मार्क्सवाद क्या है?

🔹नव मार्क्सवाद के प्रमुख विचारक ।

🔹नव मार्क्सवाद की उत्पत्ति और इतिहास। 

🔹नव मार्क्सवादी सिद्धांत (आलोचनात्मक सिद्धांत) 

🔹फ्रैंकफर्ट स्कूल । 

🔹संबंधित प्रश्नोत्तर 



नव मार्क्सवाद :


नव-मार्क्सवादी विचार सोवियत संघ की क्रांति के पश्चात विकसित हुए , जॉर्ज लुकाच एवं ग्रामशी जैसे मार्क्सवादी विचारों ने मार्क्स की भौतिकवादी एवं निष्क्रिय व्याख्या को अस्वीकार कर दिया । उनके अनुसार मार्च के विचारों का मूल आधार व्यक्ति निष्ठा एवं चेतना में है , यह व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता में विश्वास करते हैं ।  इनके अनुसार व्यक्ति की भौतिकवादी , प्रकतिवादी व्याख्या अपूर्ण एवं 

अपर्याप्त है । मार्क्स ने कभी भी व्यक्ति को इस रूप में चित्रित नहीं किया इसलिए ग्रामसी तथा ल्यूकाच के अनुसार मार्क्स के सिद्धांतों को प्राकृतिक विज्ञानों की भांति वस्तुनिष्ठ एवं सार्वभौमिक रूप में चित्रित करना त्रुटि पूर्ण है । 

🔹 नव मार्क्सवादी विचारक ग्रामशी तथा ल्यूकाच ने केवल भौतिक तत्वों को एकमात्र कारक मानने को भद्दा भौतिकवाद कहा । इन्होंने मार्क्स की विचारों को मानववादी एवं स्वतंत्रता प्रेमी के रूप में देखा । यह आर्थिक कारकों को पूर्ण रूप में अस्वीकृत नहीं करते बल्कि आर्थिक कारणों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक एवं चेतना के पक्षों को भी महत्व देते हैं । 

🔹 1970 के दशक में पश्चिमी यूरोपीय देशों में परंपरागत मार्क्सवादी सिद्धांतों को सीधे चुनौती दी गई । इटली ,स्पेन एवं फ्रांस जैसे देशों के साम्यवादी दलों ने सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्व की संकल्पना को अस्वीकार कर दिया तथा लोकतंत्र को प्राथमिकता प्रदान की गई । इसे ही यूरो साम्यवाद कहा जाता है । यूरो साम्यवाद का समर्थन कटास्की ने भी किया था । ग्रामशी ने इसे स्थितियों के युद्ध के रूप में चित्रित किया था । 

🔹 मार्क्सवादी विचारों के अनुसार साम्यवाद की प्राप्ति का कोई एक सार्वभौमिक मॉडल नहीं हो सकता बल्कि साम्यवाद की प्राप्ति का तरीका विभिन्न देशों की परिस्थितियों के अनुसार होगा । इन विचारकों के अनुसार सर्वहारा वर्ग में केवल श्रमिक ही नहीं अपितु कृषक, बुद्धिजीवी, व्यवसाय, सिविल सेवक तथा छोटे उद्यमी भी पूंजीवाद का विरोध करेंगे । इनके अनुसार साम्यवादी आदर्श की प्रति क्रांतिकारी तरीके से न होकर विकासवादी एवं क्रमिक रूप से संभव है। 

🔹यूरो साम्यवाद के प्रमुख प्रवक्ता एनरिको बर्लिंगुएर (Enrico Berlinguer) एवं सेंटियागो कैरीलो हैं, इन्होंने स्टालिनवाद मॉडल की कड़ी आलोचना की । 

🔹 द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात नव-वामपंथवादी  विचारधारा के प्रमुख सदस्य होरखाइमर और  थीओडोर ने   ल्यूकाच व ग्रामशी की परंपरा को आगे बढ़ाया । इन्होंने पूंजीवादी समाज की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें मानव पराया हो गया है ,मानवीय स्वतंत्रता समाप्त हो गई है और इस तकनीकी प्रगति के युग में मानव अपनी आध्यात्मिक आवश्यकताओं से विमुख हो गया है । 

🔹 मार्क्यूज के अनुसार पूंजीवादी व्यवस्था को नृजातीय एवं प्रजातीय ,अल्पसंख्यक ,बेरोजगार और दलित इसके आधार को नष्ट कर सकते हैं परंतु मार्क्यूज की संकल्पना में सर्वहारा वर्ग की संकल्पना आशावादी नहीं है । 

            अतः  नव मार्क्सवादियों के अनुसार वर्तमान पूंजीवादी समाज की त्रुटियों को लोकतांत्रिक तरीके से दूर किया जा सकता है, जिसका अर्थ है कि लोकतंत्र का प्रयोग सामाजिक,आर्थिक एवं राजनीतिक प्रत्येक क्षेत्र में होना चाहिए । नव मार्क्सवादी आर्थिक नियतिवाद की बजाय स्वतंत्रता और लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। इन्होंने कार्ल पापर की आलोचना का भी खंडन किया, कार्ल पापर ने मार्क्स को ' मुक्त समाज का शत्रु ' माना था । 


👉 प्रमुख नव मार्क्सवादी विचारक ग्राम्शी, मार्क्यूज, होर्कहाइमर, अडोर्नो, फ्रॉम, अल्थूसर और हैबरमास आदि हैं, जिन्होंने मार्क्सवाद को आर्थिक सीमाओं से बाहर निकालकर उसे सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक आयामों तक विस्तारित किया । 



👉नव मार्क्सवाद की उत्पत्ति और इतिहास

नव मार्क्सवाद का विकास 20वीं शताब्दी में हुआ। यह पारंपरिक मार्क्सवाद की सीमाओं को देखते हुए विकसित किया गया ताकि बदलते सामाजिक ढाँचे को बेहतर ढंग से समझा जा सके। फ्रैंकफर्ट स्कूल के विचारकों ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई।

👉नव मार्क्सवाद की उत्पत्ति के प्रमुख कारण निम्नवत हैं 

औद्योगिक समाज का विस्तार

उपभोक्तावाद का उदय

सांस्कृतिक प्रभुत्व का बढ़ना



नव-मार्क्सवाद /नव-वामपंथवाद/फ्रैंकफर्ट स्कूल : 

 आलोचनात्मक सिद्धांत (Critical Theory) 

   नव मार्क्सवाद ने परंपरागत मार्क्सवाद के वैज्ञानिक एवं भौतिकवादी आकांक्षा को अस्वीकार कर दिया उन्होंने मार्क्स की मान्यताओं की आलोचना की । इस विचारधारा का विकास जर्मनी में स्थित फ्रैंकफर्ट स्कूल द्वारा किया गया । 

🔹 इसकी पहली पीढ़ी में प्रमुख दार्शनिक होरखाइमर, अर्थशास्त्री पोलाक, दार्शनिक एडोर्नो, दार्शनिक मार्क्यूज ,   न्यूमैन और कचाइमर है ।  द्वितीय पीढ़ी के विचारकों में दार्शनिक हैबरमास, दार्शनिक वेलमार, राजनीति वैज्ञानिक ऑफि, एंट्रोपोलॉजिस्ट एडर हैं।  

🔹 कोळकोवस्की के अनुसार फ्रैंकफर्ट स्कूल की मूल्य मान्यताएं निम्नलिखित है। 

        👉यह मार्क्स को पवित्र एवं त्रुटिहीन नहीं मानते बल्कि वर्तमान संस्कृति के विश्लेषण एवं आलोचना का आरंभ बिंदु मानते हैं । इन पर गैर मार्क्सवादी विचारको जैसे इम्यूअल कांट, हीगल , नीत्शे एवं फ्रायड का प्रभाव है । 

        👉 यह किसी भी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं है इन्होंने साम्यवाद अथवा सामाजिक लोकतंत्र से स्वयं को कभी नहीं जोड़ा । 

      👉 यह सिद्धांत की स्वायत्तता बनाए रखने के समर्थक थे और मार्क्स के प्रैक्सीस के विचारों के  विरोधी थे , यद्यपि ये वर्तमान व्यवस्था के विरोधी थे एवं इसमें परिवर्तन चाहते थे । 

     👉 यह सर्वहारा वर्ग एवं साम्यवादी दल के पूर्ण समर्थन में नहीं थे, यह सर्वहारा वर्ग की क्रांति के सिद्धांत का समर्थन नहीं करते,यद्यपि सर्वहारा वर्ग के शोषण से सहमत थे । 

      👉 इन्होंने परंपरावादी मार्क्स को अस्वीकार कर दिया परंतु क्रांतिकारी एवं बुद्धिजीवी आंदोलन के समर्थक थे ।  इन्होंने सुधारवादी एवं क्रमिक परिवर्तन का विरोध किया तथा वर्तमान में पूर्ण बदलाव चाहते थे । 



संबंधित प्रश्नोत्तर:


1. नव मार्क्सवाद क्या है?

उत्तर: नव मार्क्सवाद मार्क्सवादी सिद्धांत का आधुनिक रूप है जो केवल आर्थिक वर्ग संघर्ष तक सीमित न रहकर संस्कृति, विचारधारा, मीडिया और सत्ता संरचनाओं के माध्यम से समाज में प्रभुत्व के तरीकों का अध्ययन करता है।


2. फ्रैंकफर्ट स्कूल क्या है?

उत्तर: फ्रैंकफर्ट स्कूल जर्मनी में स्थित सामाजिक विज्ञान का एक बौद्धिक समूह था जिसने आलोचनात्मक सिद्धांत (Critical Theory) का विकास किया। इसका उद्देश्य पूँजीवादी समाज की वैचारिक और सांस्कृतिक आलोचना करना था।


3. नव मार्क्सवाद और फ्रैंकफर्ट स्कूल का संबंध क्या है?

उत्तर: फ्रैंकफर्ट स्कूल नव मार्क्सवाद का प्रमुख वैचारिक आधार है। इसके विचारकों ने मार्क्सवाद को सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से पुनर्व्याख्यायित किया।


4. फ्रैंकफर्ट स्कूल के प्रमुख विचारक कौन थे?

उत्तर:

मैक्स हॉर्कहाइमर

थियोडोर एडोर्नो

हर्बर्ट मार्क्यूज़

एरिक फ्रॉम

वाल्टर बेंजामिन


5. आलोचनात्मक सिद्धांत (Critical Theory) क्या है?

उत्तर: यह सिद्धांत समाज की उन संरचनाओं की आलोचना करता है जो मानव स्वतंत्रता को बाधित करती हैं। इसका उद्देश्य समाज को केवल समझना नहीं बल्कि बदलना भी है।


6. संस्कृति उद्योग (Culture Industry) की अवधारणा क्या है?

उत्तर: एडोर्नो और हॉर्कहाइमर के अनुसार, संस्कृति उद्योग जनता की चेतना को नियंत्रित करने का साधन है जो उन्हें उपभोक्तावादी मानसिकता में बाँध देता है।


7. नव मार्क्सवाद पारंपरिक मार्क्सवाद से कैसे भिन्न है?

उत्तर:

पारंपरिक मार्क्सवाद :

मुख्य फोकस :  आर्थिक संरचना

संघर्ष :  वर्ग संघर्ष

दृष्टिकोण : भौतिकवादी

नव मार्क्सवाद : 

मुख्य फोकस : सांस्कृतिक व वैचारिक संरचना 

संघर्ष : प्रभुत्व और चेतना 

दृष्टिकोण : बहुआयामी 


8. हर्बर्ट मार्क्यूज़ का क्या योगदान था?

उत्तर: उन्होंने उपभोक्तावादी समाज की आलोचना की और "One Dimensional Man" की अवधारणा प्रस्तुत की जिसमें व्यक्ति की आलोचनात्मक सोच दब जाती है।


9. ग्राम्शी का हेगेमनी सिद्धांत क्या है?

उत्तर: ग्राम्शी के अनुसार शासक वर्ग केवल बल से नहीं बल्कि सहमति और संस्कृति के माध्यम से प्रभुत्व स्थापित करता है।


10. नव मार्क्सवाद की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर:

सांस्कृतिक प्रभुत्व का विश्लेषण

मीडिया की आलोचना

चेतना के पुनर्निर्माण पर बल

सत्ता की बहुस्तरीय अवधारणा


11. फ्रैंकफर्ट स्कूल का लक्ष्य क्या था?

उत्तर: समाज की आलोचना के माध्यम से व्यक्ति को वैचारिक दासता से मुक्त कराना और एक मानवतावादी समाज की स्थापना करना।


12. नव मार्क्सवाद की आलोचना क्यों की जाती है?

उत्तर:

व्यावहारिक समाधान की कमी

अत्यधिक दार्शनिक होना

आर्थिक विश्लेषण को कमजोर करना


13. भारतीय संदर्भ में नव मार्क्सवाद का महत्व

उत्तर: यह जाति, लिंग और वर्ग आधारित असमानताओं के विश्लेषण में सहायक है और सामाजिक न्याय के विमर्श को सशक्त करता है।



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