जॉन लॉक (John locke) कौन थे? जॉन लॉक का जीवन परिचय, अनुभववाद, प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक समझौता सिद्धांत, क्रांति का विचार, प्रमुख रचनाएं व महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर विस्तार से पढ़ें।


जॉन लॉक (John locke) कौन थे? जॉन लॉक का जीवन परिचय, अनुभववाद, प्राकृतिक अधिकार, सामाजिक समझौता सिद्धांत, क्रांति का विचार, प्रमुख रचनाएं व महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर विस्तार से पढ़ें।



🔹जॉन लॉक कौन थे? उनका जीवन परिचय : जॉन लॉक (1632-1704) 

🔹जॉन लॉक का अनुभववाद का सिद्धांत 

🔹जॉन लॉक का प्राकृतिक अधिकार का सिद्धांत 

🔹जॉन लॉक का सामाजिक समझौता सिद्धांत

🔹जॉन लॉक का क्रांति का विचार 

🔹जॉन लॉक की रचनाएं 

🔹 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर।



जॉन लॉक का राजनीतिक दर्शन (John Locke Philosophy) 






जॉन लॉक कौन थे? उनका जीवन परिचय : जॉन लॉक (1632-1704)


जॉन लॉक का जन्म इंग्लैंड के समरसेट शायर में रिंगटन नामक स्थान पर 29 अगस्त 1632 ई. में हुआ था । उनके  पिता एक वकील थे । जॉन लॉक ने अपनी उच्च शिक्षा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने दर्शनशास्त्र, चिकित्सा एवं एवं विज्ञान का अध्ययन किया। जॉन लॉक को उदारवाद का जनक कहा जाता है। ये प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धांत के जन्मदाता हैं। उनके सिद्धांत को अनुभववादी सिद्धांत कहा जाता है क्योंकि उनके अनुसार ज्ञान पांच इंद्रियों के अनुभव से प्राप्त होता है। वेवर के अनुसार ,जॉन लॉक महान परंपरा, उदारवाद का पहला प्रवक्ता तथा मध्यकाल का अंतिम प्रवक्ता है। जॉन लॉक की प्रसिद्ध पुस्तक " An Essay concerning Human understanding"   है। जोकि 1687 में लिखी गई तथा 1690 में प्रकाशित हुई, इसमें उन्होंने अनुभववाद का प्रतिपादन किया। जॉन लॉक की मृत्यु 28 अक्टूबर 1704 को इंग्लैंड में हुई। उनके विचार आज भी लोकतंत्र, मानव अधिकार और संवैधानिक शासन की नींव माने जाते हैं।


जॉन लॉक का अनुभववाद का सिद्धांत


जॉन लॉक के अनुसार व्यक्ति का मस्तिष्क जन्म से खाली स्लेट (Tabula Rasa) के समान होता है ,कोई भी ज्ञान जन्मजात नहीं होता । इस विश्व का ज्ञान एवं उसका औचित्य केवल अनुभव द्वारा ही सिद्ध किया जा सकता है। उनका यह सिद्धांत, बुद्धिवाद का विरोधी विचार है क्योंकि बुद्धिवाद के अनुसार , ज्ञान प्रगानुभविक होता है । जॉन लॉक ने अपनी पुस्तक " An Essay concerning Human understanding " में अनुभववादी सिद्धांत का वर्णन किया जिसके अनुसार व्यक्ति का समूचा ज्ञान अनुभव पर आधारित है, जोकि पांच ज्ञानेंद्रियों द्वारा प्राप्त होता है। 



जॉन लॉक का प्राकृतिक अधिकार का सिद्धांत (john Locke Natural Rights theory in hindi ) :



जॉन लॉक ने रॉबर्ट फिल्मर द्वारा दिया गया प्राकृतिक अधीनता के सिद्धांत का खंडन किया । रॉबर्ट फिल्मर के अनुसार ,जिस प्रकार एक बच्चे पर पिता का प्राकृतिक नियंत्रण होता है ,उसी प्रकार राजा का प्रजा पर स्वाभाविक नियंत्रण होता है । परंतु जॉन लॉक के अनुसार बच्चा अल्पवयस्क होता है , इसलिए पिता उसे निर्देश दे सकता है , परंतु राजा प्रजा को निर्देश नहीं दे सकता। उसे शासन करने के लिए व्यक्ति से सहमति प्राप्त करना होगा । 

🔹जॉन लॉक को अधिकारो के सिद्धांत का जन्मदाता कहा जाता है । उनके अनुसार प्राकृतिक अधिकारों में जीवन, स्वतंत्रता तथा संपत्ति के अधिकार को शामिल किया गया । उनके अनुसार व्यक्ति को प्राकृतिक अधिकार जन्मजात प्राप्त होते हैं। जैसे त्वचा का रंग । 

🔹 जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकारों का समर्थन , अमेरिकी संविधान निर्माता जैफर्सन एवं मेडीसन ने किया । जैफर्सन के अनुसार ,व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता एवं सुख लेने का अधिकार है। ' Rights of Man '  पुस्तक के लेखक थॉमस पेन द्वारा भी इनका समर्थन किया गया । 

🔹आलोचना : बेन्थम ने जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकारों की आलोचना की , उनके अनुसार राज्य एवं सरकार से पहले अधिकारों की कल्पना अतार्किक है। इनकी आलोचना एडमंड बर्क तथा रूसो ने भी की । 


जॉन लॉक का सामाजिक समझौता सिद्धांत
(John locke Social Contract theory in Hindi ):



जॉन लॉक के अनुसार , सामाजिक समझौते से राज्य की उत्पत्ति हुई। उसने मानव स्वभाव व प्राकृतिक अवस्था का वर्णन करते हुए राज्य के उत्पत्ति की व्याख्या की । 

🔹मानव स्वभाव:

जॉन लॉक के अनुसार , मानव सुख प्राप्त करने का इच्छुक होता है तथा दुख से बचना चाहता है। उनके अनुसार व्यक्ति का स्वभाव नेक व अच्छा है । व्यक्ति को जन्म से ही प्राकृतिक अधिकार प्राप्त है । उन्होंने संपत्ति के अधिकार को सबसे अधिक महत्व दिया । 

🔹प्राकृतिक अवस्था :

जॉन लॉक ने अपनी पुस्तक ' Essays on the law of nature '  में प्राकृतिक अवस्था का वर्णन किया । उनके अनुसार यह अवस्था पूर्व राजनीतिक है। यह शांति और सहयोग की अवस्था थी, जोकि प्राकृतिक नियमों से संचालित थी।  

🔹जॉन लॉक के अनुसार , विधि स्वतंत्रता का संरक्षण करती है, विधि के बिना स्वतंत्रता की संकल्पना करना कठिन है। जहां पर विधि समाप्त होती है वहां पर निरंकुशता आरम्भ होती है। 

🔹 जॉन लॉक के सामाजिक समझौते का मूल कारण :

जॉन लॉक के अनुसार प्राकृतिक अवस्था में कुछ असुविधा थी, जो निम्नलिखित है - 

(i) स्पष्ट एवं मानव निर्मित कानून का अभाव था।  

(ii) नियमों को संचालित करने की कोई संस्था नहीं थी । 

(iii) नियमों की व्याख्या करने  की संस्था का अभाव था।  

               उनके अनुसार,निम्नलिखित दो समझौते पाए जाते हैं। 

 (i) व्यक्ति ने मिलकर नागरिक समाज का निर्माण किया । 

(ii) नागरिक समाज के द्वारा राज्य या सरकार का निर्माण किया गया । 

🔹जॉन लॉक ने केवल दंड देने का अधिकार राज्य को सौंपा । उनके अनुसार समझौते के पश्चात भी व्यक्ति के प्राकृतिक अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने सरकार की शक्तियों को सीमित करने के लिए , सरकार को विधायिका, कार्यपालिका एवं संधि निर्मात्री शक्ति के रूप में विभाजित किया । उन्होंने संप्रभुता के स्थान पर All supreme Power शब्द का प्रयोग किया । 

🔹सामाजिक समझौते की विशेषता :

जॉन लॉक के अनुसार , सामाजिक समझौता पूर्व राजनीतिक था , पूर्व सामाजिक नहीं। इस समझौते में व्यक्तियों ने अपने प्राकृतिक अधिकार अपने पास रखा केवल दंड देने का अधिकार सौंपा। उनके अनुसार ,समझौता टूटने के बाद सरकार समाप्त होगी इसलिए व्यक्ति प्राकृतिक अवस्था में नहीं जाएगा। 


जॉन लॉक का क्रांति का विचार :


जॉन लॉक का क्रांति का सिद्धांत (Theory of Revolution) उनके राजनीतिक दर्शन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पक्ष है। यह सिद्धांत उनकी प्रसिद्ध कृति ' Two Treatises of Government ' में मिलता है और आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला माना जाता है। जॉन लॉक के विचारों में सीमित और संवैधानिक शासन का आधार पाया जाता है, उन्होंने निम्न आधारों पर क्रांति को औचित्यपूर्ण माना है । 

(i) यदि राजा या एक व्यक्ति विधि के शासन पर निरंकुश शासन करने लगे ।

(ii)जब राजा विधायिका के स्वतंत्र कार्यकरण में बाधा उत्पन्न करें । 

(iii) जब राजा निरंकुश रूप में चुनाव या चुनाव के तरीके में परिवर्तन करने लगे । 

(iv)जब राजा या विधायिका नागरिकों को किसी विदेशी शक्ति के हवाले सौंपने लगे। 

(v) यदि सर्वोच्च अधिकारी विधि का पालन न करें। 


🔹लॉक के अनुसार , सरकार की निरंकुशता ही अराजकता का कारण बनती है । जनता सामान्यतः सहनशील होती है

क्रांति तभी होती है जब अत्याचार असहनीय हो जाए ।

जॉन लॉक के अनुसार , क्रांति के परिणामस्वरूप सरकार को हटाया जाता है, परंतु राज्य या commonwealth विद्यमान रहता है। 

🔹जॉन लॉक ने सरकार को एक लिमिटेड लाइबिलिटी कंपनी की संज्ञा दी। 

🔹जॉन लॉक के अनुसार राज्य का कार्य, विधि व्यवस्था बनाए रखना तथा बाह्य शत्रुओं के आक्रमण से रक्षा करना है । 

🔹क्रांति के सिद्धांत का महत्व : जॉन लॉक के क्रांति के सिद्धांत से निरंकुश शासन पर नियंत्रण , लोकतांत्रिक शासन की रक्षा तथा संविधानवाद का समर्थन पर महत्वपूर्ण असर पड़ा।  इस सिद्धांत का  अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम पर गहरा प्रभाव दिखाई देता है। 



जॉन लॉक की रचनाएं:


An Essay concerning Human understanding: 1690 

Four letter concerning toleration -1689

A letter concerning toleration -1689

The reasonableness of Christianity -1695

Two treatises of government - 1689 

Some thoughts concerning education - 1693 



👉 शक्ति प्रथक्करण के सिद्धांत के जन्मदाता मांटेस्क्यू की प्रसिद्ध रचना The sprit of the laws (1748) है। 

👉 सी बी मैकफर्सन की प्रसिद्ध रचना The polotical theory of possessive Individualism है। जिसमें उन्होंने हॉब्स व लॉक को स्वत्वमूलक व्यक्तिवादी कहा । 

उनके अनुसार जॉन लॉक ' पूंजीवाद के जन्मदाता ' हैं। 

➡️ थॉमस हॉब्स का जीवन परिचय, सामाजिक अनुबंध सिद्धांत, राजनीतिक विचार व प्रमुख रचनाएं जानने के लिए ये आर्टिकल पढ़े 👉 

https://www.polsciencenet.in/2025/12/Thomas%20Hobbs.html?m=1


➡️रूसो का जीवन परिचय, सामाजिक अनुबंध सिद्धांत,शिक्षा दर्शन व रचनाओ के बारे ने जानकारी के लिए ये आर्टिकल पढ़ें 👉 

जॉन लॉक  महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Exam Oriented) : 


प्रश्न 1. जॉन लॉक का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: जॉन लॉक का जन्म 29 अगस्त 1632 ई. को इंग्लैंड के समरसेट शायर में रिंगटन नामक स्थान पर हुआ।


प्रश्न 2. जॉन लॉक को किस विचारधारा का जनक कहा जाता है?

उत्तर: जॉन लॉक को उदारवाद (Liberalism) का जनक कहा जाता है।


प्रश्न 3. Tabula Rasa से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: Tabula Rasa का अर्थ है खाली स्लेट—लॉक के अनुसार मनुष्य का मस्तिष्क जन्म से खाली होता है।


प्रश्न 4. जॉन लॉक की प्रमुख राजनीतिक कृति कौन-सी है?

उत्तर: Two Treatises of Government।


प्रश्न 5. जॉन लॉक के अनुसार ज्ञान का मुख्य स्रोत क्या है?

उत्तर: अनुभव (Experience)।


प्रश्न 6. जॉन लॉक के अनुभववाद के सिद्धांत की व्याख्या करें।

उत्तर:   जॉन लॉक के अनुसार कोई भी ज्ञान जन्मजात नहीं होता। मनुष्य का मस्तिष्क जन्म के समय Tabula Rasa होता है। समस्त ज्ञान पाँच इंद्रियों द्वारा प्राप्त अनुभव से उत्पन्न होता है। यह सिद्धांत बुद्धिवाद का विरोध करता है।


प्रश्न 7. जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकार कौन-से हैं?

उत्तर:  जॉन लॉक के अनुसार मनुष्य को जन्म से तीन प्राकृतिक अधिकार प्राप्त हैं—

जीवन का अधिकार

स्वतंत्रता का अधिकार

संपत्ति का अधिकार


प्रश्न 8. जॉन लॉक ने रॉबर्ट फिल्मर के किस सिद्धांत का खंडन किया?

उत्तर:  जॉन लॉक ने दैवी अधिकार एवं प्राकृतिक अधीनता के सिद्धांत का खंडन किया और कहा कि शासक का अधिकार जनता की सहमति पर आधारित होना चाहिए ।


प्रश्न 9. जॉन लॉक के अनुसार प्राकृतिक अवस्था कैसी थी?

उत्तर: जॉन लॉक के अनुसार प्राकृतिक अवस्था शांति, स्वतंत्रता और समानता की अवस्था थी, जो प्राकृतिक कानूनों द्वारा संचालित थी। 







#Polsciencenet

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Home

रूसो का जीवन परिचय । जीन जैक्स रूसो का दर्शन,प्राकृतिक अवस्था सिद्धांत, सामाजिक अनुबंध सिद्धांत, शिक्षा दर्शन एवं प्रमुख कृतियाँ  ।