भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत एवं कांग्रेस की स्थापना (1885), पृष्ठभूमि, उद्देश्य, प्रमुख विचार और महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर – प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सरल, संक्षिप्त और विश्वसनीय अध्ययन सामग्री।



🔹भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत ।

🔹भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ।

🔹कांग्रेस की स्थापना की पृष्ठभूमि ।

🔹कांग्रेस की स्थापना का उद्देश्य ।

🔹कांग्रेस के विषय में विचार ।

🔹महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ।



भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत (National movement): 


भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में उन ऐतिहासिक परिस्थितियों के बीच हुई, जब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नीतियों ने भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक ढाँचे पर गहरा प्रभाव डाला।

            वर्ष 1857 के विद्रोह, अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार, आधुनिक संचार साधनों (रेल, डाक, टेलीग्राफ) के विकास और एक नए शिक्षित मध्यम वर्ग के उभार ने भारतीयों को पहली बार यह सोचने पर मजबूर किया कि वे केवल अलग-अलग प्रांतों या समुदायों का समूह नहीं, बल्कि एक साझा राजनीतिक पहचान रखने वाला राष्ट्र हैं। इसी दौर में दादाभाई नौरोजी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नेताओं ने आर्थिक शोषण, प्रशासनिक भेदभाव और नस्लीय असमानता जैसे मुद्दों को तार्किक रूप से उठाना शुरू किया। भारतीय प्रेस और सार्वजनिक सभाओं ने इन विचारों को जनसाधारण तक पहुँचाया, जिससे राष्ट्रीय चेतना का प्रसार हुआ।

          1870–80 के दशक में बनी प्रांतीय राजनीतिक संस्थाएँ—जैसे इंडियन एसोसिएशन, बॉम्बे एसोसिएशन और मद्रास महाजन सभा—ने इस चेतना को संगठित रूप दिया और अंततः 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के लिए आधार तैयार किया। प्रारंभिक चरण में यह आंदोलन उदारवादी नेताओं के नेतृत्व में संवैधानिक सुधारों, प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी और ब्रिटिश सरकार के साथ संवाद की नीति पर आधारित था; परंतु यही क्रमिक राजनीतिक जागरूकता आगे चलकर व्यापक जनआंदोलनों और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग में परिवर्तित हुई। इस प्रकार, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत किसी एक घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि सामाजिक जागरण, आर्थिक असंतोष, राजनीतिक शिक्षण और राष्ट्रीय एकता की विकसित होती भावना का संयुक्त परिणाम थी, जिसने आधुनिक भारत के स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी। 


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना :


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, 28 दिसंबर 1885 को ब्रिटिश अधिकारी ए ओ ह्यूम द्वारा की गई । इसका प्रथम अधिवेशन पहले पूना में आयोजित किया जाना था , परंतु पूना में प्लेग फैल जाने के कारण अधिवेशन बंबई (अब मुंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित किया गया। 

        भारतीय राष्ट्रीय संघ ( कांग्रेस की पूर्वगामी संस्था) की स्थापना का विचार सबसे पहले डफरिन के दिमाग में आया था  फिर दादा भाई नौरोजी ने इस संस्था का नाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दिया। 

     कांग्रेस के पहले अध्यक्ष में व्योमेश चंद्र बनर्जी थे तथा कांग्रेस के पहले अधिवेशन में 72 प्रतिनिधि थे। 


कांग्रेस की स्थापना की पृष्ठभूमि


कांग्रेस की स्थापना के पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक कारण थे, जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नवत हैं। 


1️⃣  अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव : 

शिक्षित भारतीयों में राजनीतिक चेतना बढ़ रही थी। वे अधिकार, प्रतिनिधित्व और प्रशासन में भागीदारी की मांग कर रहे थे।


2️⃣ भारतीयों के साथ भेदभाव

तत्कालीन समय में उच्च पदों पर अंग्रेजों का वर्चस्व कायम था , अंग्रेज भारतीयों के साथ प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक भेदभाव कर रहे थे। तथा सिविल सेवा परीक्षा केवल इंग्लैंड में आयोजित की जाती थी, जिसमें आयु सीमा कम होने के कारण भारतीयों का पहुंचना बहुत कठिन था , भारतीयों को केवल निम्न पदों तक सीमित रखा जाता था। 



3️⃣ प्रेस और जनमत

भारतीय प्रेस ने भारतीय समाज में राजनीतिक जागरूकता, राष्ट्रीय एकता और ब्रिटिश नीतियों के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण पैदा किया। इसी जागरूक जनमत ने एक ऐसे राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता महसूस कराई जो जनता की मांगों को संगठित रूप से रख सके । 


4️⃣ प्रांतीय राजनीतिक संस्थाएँ  :


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से पहले कई संस्थाएँ बन चुकी थीं ।

लैंड होल्डर्स सोसाइटी (1838 )- यह संस्था बिहार, बंगाल और उड़ीसा की जमीदारों की थी इसका मुख्य उद्देश्य था अपने वर्ग के हितों की रक्षा करना । 


बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी (1839- 43): इस संस्था की स्थापना का उद्देश्य आम जनता के हितों की रक्षा करना एवं उन्हें बढ़ावा देना था यह संस्था बुद्धि की अभिजात तंत्र का प्रतिनिधित्व करती थी । 

बॉम्बे एसोसिएशन एवं मद्रास महाजन सभा : इन संस्थाओ की स्थापना 1852 में हुई। 


इंडियन एसोसिएशन (सुरेन्द्रनाथ बनर्जी)(1876) :   इस संस्था की स्थापना सुरेंद्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस के सहयोग से हुई ।  इस संस्था को कांग्रेस की पूर्वगामी संस्था कहा जाता है। 


इन सभी संस्थाओं को एक राष्ट्रीय मंच की आवश्यकता थी — यही भूमिका कांग्रेस ने निभाई।


कांग्रेस की स्थापना का उद्देश्य :


प्रारंभिक कांग्रेस के नेता उदारवादी (Moderates) थे। जिसमें से मुख्यतः गोपाल कृष्ण गोखले, जस्टिस महादेव गोविंद रानाडे , फिरोज शाह मेहता एवं दादाभाई नौरोजी थे। उनके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे


(i) भारतीयों को प्रशासन में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाना - प्रशासन में भारतीयों को प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए उदारवादी नेताओं ने " प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं " का नारा दिया तथा व्यवस्थापिका के विस्तार की मांग की ,साथ ही साथ व्यवस्थापिका में गैर सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की भी मांग रखी। 

(ii) उदारवादी नेताओं द्वारा सरकार व जनता के बीच संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से इस संस्था का निर्माण किया गया।

(iii)  संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से सुधार लाने के लिए , चहारदीवारी के अंदर रहकर ही आंदोलन को बढ़ावा देना उचित समझा गया । 

(iv)देश में  राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की गई। 

(v)भारतीयों को राजनीतिक रूप से शिक्षित करना इनका उद्देश्य था, जिससे ज्यादा से ज्यादा भारतीय राजनीति में सहभाग ले सके । 


👉 शुरुआत में कांग्रेस स्वतंत्रता की मांग नहीं कर रही थी, बल्कि सुधारों की मांग कर रही थी। ।



कांग्रेस के विषय में विचार:


🔹 डफरिन के अनुसार, कांग्रेस जनता के उस अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है जिसकी संख्या अतिसूक्ष्म है । 

🔹 वायसराय लॉर्ड कर्जन के अनुसार, कांग्रेस अपनी मौत की घड़ियां गिन रही, भारत में रहते हुए मेरी एक सबसे बड़ी इच्छा है कि मै कांग्रेस की शांतिपूर्वक मरने में मदद कर सकूं।  

🔹 बंकिम चंद्र चटर्जी के अनुसार, कांग्रेस के लोग पदों के भूखे हैं । 

🔹 लॉर्ड कर्जन ने कांग्रेस को देशद्रोही संगठन कहा । 

🔹 तिलक ने कांग्रेस के बारे में कहा, कि यदि वर्ष में हम एक बार मेंढक की तरह टर्राए ,तो हमें कुछ नहीं मिलेगा। 

 🔹 लाला लाजपत राय ने कांग्रेस सम्मेलनों को शिक्षित भारतीयों के वार्षिक राष्ट्रीय मेले की संज्ञा दी।  

🔹 बिपिन चंद्र पाल ने कांग्रेस को ' याचना संस्था' कहा ।

 



महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :


1️⃣ कांग्रेस की स्थापना 1885 में क्यों हुई?

उत्तर - ब्रिटिश शासन की नीतियों से भारतीयों में असंतोष बढ़ रहा था। शिक्षित भारतीयों को अपनी समस्याएँ सरकार तक पहुँचाने के लिए एक राजनीतिक मंच की जरूरत थी। इसी उद्देश्य से 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की गई।


2️⃣ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का उद्देश्य क्या था?

उत्तर - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित था।

(i) भारतीयों को एक साझा राष्ट्रीय मंच देना ।

(ii) सरकार के सामने भारतीयों की मांगें और शिकायतें रखना ।

(iii) प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना ।

(iv) विभिन्न प्रांतों के लोगों में राष्ट्रीय एकता विकसित करना ।

(v) संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से राजनीतिक सुधार लाना।


3️⃣ कांग्रेस की स्थापना का इतिहास बताइए। 

उत्तर - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ए. ओ. ह्यूम (A.O. Hume) ने की, जो एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी थे। उन्होंने भारतीय नेताओं को संगठित किया। 1885 में बंबई (मुंबई) में कांग्रेस का पहला अधिवेशन हुआ, जिससे एक संगठित राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत हुई।


4️⃣ कांग्रेस की स्थापना के समय भारत की स्थिति क्या थी?

उत्तर - भारत पूरी तरह ब्रिटिश शासन के अधीन था । 

भारतीयों को उच्च प्रशासनिक पदों में बहुत कम अवसर मिलते थे। आर्थिक शोषण के कारण गरीबी और अकाल बढ़ रहे थे। शिक्षित मध्यम वर्ग में राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही थी। प्रेस, शिक्षा और सामाजिक सुधार आंदोलनों से राष्ट्रीय भावना विकसित हो रही थी। 


5️⃣ कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन कब और कहाँ हुआ?

उत्तर - 

 तिथि: 28 दिसंबर 1885 को 

 स्थान: बंबई (अब मुंबई)

 अध्यक्ष: व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee)।



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