बंगाल विभाजन 1905 क्या था? क्यों हुआ? स्वदेशी आंदोलन, विरोध और 1911 में रद्द होने तक का पूरा इतिहास UPSC/PSC/UGC NET JRF के लिए सरल भाषा में।
🔹बंगाल विभाजन (1905)
🔹बंगाल विभाजन के उद्देश्य ।
🔹बंगाल विभाजन के कारण ।
🔹बंगाल विभाजन का विरोध ।
🔹बंगाल विभाजन के परिणाम ।
🔹बंगाल विभाजन कब रद्द हुआ ।
🔹बंगाल विभाजन (1905) – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर ।
बंगाल विभाजन (1905):
बंगाल विभाजन ब्रिटिश सरकार द्वारा लिया गया ऐसा निर्णय था जिसने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा दी। इसकी घोषणा 20 जुलाई 1905 को की गई , परंतु यह 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ। बंगाल में 16 अक्टूबर 1905 को शोक दिवस के रूप में मनाया गया । बंगाल विभाजन के समय भारत का वायसराय लार्ड कर्जन था। बंगाल विभाजन के विरोध में पूरे भारत में व्यापक आंदोलन शुरू हुआ, जिसे स्वदेशी आंदोलन कहा जाता है।
बंगाल ब्रिटिश भारत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण प्रांत था। इसमें आज के पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश,बिहार, ओडिशा, असम के कुछ हिस्से शामिल थे। इस विभाजन पर गोपाल कृष्ण गोखले ने कहा था कि
' यह एक निर्मम भूल' है।
ब्रिटिश सरकार ने इसे दो भागों में विभाजित किया।
1. पूर्वी बंगाल और असम , जिसकी राजधानी ढाका थी।
2. पश्चिमी बंगाल,जिसकी राजधानी कलकत्ता थी।
यह निर्णय तत्कालीन वायसराय Lord Curzon द्वारा लिया गया था।
बंगाल विभाजन के उद्देश्य:
बंगाल विभाजन के दो मुख्य उद्देश्य थे।
1. मूल बंगाल में बंगालियों की आबादी कम करके उन्हें अल्पसंख्यक बनाना था। मूल बंगाल में 1 करोड़ 70 लाख बंगाली तथा 3.7 करोड़ उड़िया एवं हिंदी वासी लोगों को रखने की योजना थी ।
2. इसके पीछे धार्मिक विभाजन का भी उद्देश्य था । बंगाल का विभाजन करके ढाका को बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी वाले प्रांत की राजधानी बनाना था ।
बंगाल विभाजन के कारण:
बंगाल विभाजन के पीछे ब्रिटिश सरकार ने कुछ आधिकारिक कारण बताए, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार इसके पीछे वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य भी थे।
1. प्रशासनिक सुविधा :
ब्रिटिश सरकार के अनुसार बंगाल प्रांत बहुत बड़ा हो गया था और उसका प्रशासन करना कठिन था। इसकी आबादी लगभग 8 करोड़ थी तथा क्षेत्र बहुत विशाल था । इसलिए प्रशासन को आसान बनाने के लिए विभाजन का निर्णय लिया गया।
2. राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना:
उस समय बंगाल भारत में राष्ट्रीय आंदोलन का सबसे प्रमुख केंद्र बन चुका था। भारत में शिक्षा और प्रेस का विकास बहुत तेजी से हो रहा था तथा जनता में राजनीतिक जागरूकता का विकास एवं राष्ट्रीयता की भावना भी बढ़ रही थी । इस वजह से ब्रिटिश सरकार को डर था कि यह आंदोलन पूरे भारत में फैल सकता है। इसलिए उन्होंने बंगाल को विभाजित कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की।
3. “फूट डालो और राज करो” की नीति :
ब्रिटिश सरकार की नीति Divide and Rule थी। इसलिए उन्होंने धार्मिक आधार पर समाज को विभाजित करने का प्रयास किया। ब्रिटिश सरकार ने बंगाल को पूर्वी एवं पश्चिम बंगाल में विभाजित किया जिसमें पश्चिमी बंगाल में हिंदू आबादी अधिक थी तथा पूर्वी बंगाल में मुस्लिम आबादी अधिक थी।
बंगाल विभाजन का विरोध :
बंगाल विभाजन के खिलाफ पूरे भारत में व्यापक विरोध हुआ। यह आंदोलन केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे देश में फैल गया। बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ सबसे बड़ा आंदोलन स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement) था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित था ।
1. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना ।
2. स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना ।
3. भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देना ।
इस आंदोलन में लोगों ने विदेशी कपड़ों को जलाया और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाया।
➡️ बहिष्कार आंदोलन :
स्वदेशी आंदोलन के साथ-साथ बहिष्कार आंदोलन भी शुरू हुआ। इसमें लोगों ने ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया। सरकारी संस्थानों का विरोध किया एवं राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान स्थापित किए गए । इस आंदोलन में कई राष्ट्रीय नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जिसमें से प्रमुख थे :
बाल गंगाधर तिलक
बिपिन चंद्र पाल
लाला लाजपत राय
इन तीनों नेताओं को लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा Rabindranath Tagore ने भी आंदोलन का समर्थन किया और लोगों में एकता का संदेश दिया।
बंगाल विभाजन के परिणाम :
बंगाल विभाजन का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
1. राष्ट्रीय आंदोलन का विस्तार :
इस घटना के बाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन अधिक व्यापक और शक्तिशाली हो गया।
2. स्वदेशी उद्योगों का विकास :
स्वदेशी आंदोलन के कारण भारतीय उद्योगों को बढ़ावा मिला और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्रोत्साहन मिला।
3. राजनीतिक जागरूकता में वृद्धि :
बंगाल विभाजन के विरोध ने आम जनता को राजनीति से जोड़ा और स्वतंत्रता आंदोलन को जन आंदोलन बना दिया।
4. कांग्रेस में मतभेद :
इस आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर गरम दल और नरम दल के बीच मतभेद बढ़ गए।
बंगाल विभाजन कब रद्द हुआ :
भारतीय जनता के लगातार विरोध और आंदोलन के कारण ब्रिटिश सरकार को अंततः अपना निर्णय वापस लेना पड़ा। वर्ष 1911 में ब्रिटिश सरकार ने बंगाल विभाजन को रद्द कर दिया। यह घोषणा ब्रिटिश सम्राट King George V द्वारा Delhi Durbar of 1911 में की गई थी। इसी समय भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दी गई।
बंगाल विभाजन (1905) – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर :
1. बंगाल विभाजन क्या था?
उत्तर: Partition of Bengal ब्रिटिश सरकार द्वारा 1905 में किया गया प्रशासनिक विभाजन था, जिसमें बंगाल को दो भागों—पूर्वी बंगाल एवं असम और पश्चिमी बंगाल—में बाँटा गया।
2. बंगाल विभाजन कब हुआ?
उत्तर: बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 को लागू हुआ।
3. बंगाल विभाजन किसके द्वारा किया गया?
उत्तर: यह निर्णय वायसराय Lord Curzon द्वारा लिया गया।
4. बंगाल विभाजन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: आधिकारिक कारण: प्रशासनिक सुविधा
वास्तविक कारण: “फूट डालो और राज करो” नीति के तहत राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना।
5. बंगाल विभाजन के विरोध में कौन-सा आंदोलन शुरू हुआ?
उत्तर: Swadeshi Movement शुरू हुआ।
6. स्वदेशी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग
भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देना
7. बंगाल विभाजन का विरोध किन नेताओं ने किया?
उत्तर: Bal Gangadhar Tilak
Bipin Chandra Pal
Lala Lajpat Rai
8. लाल-बाल-पाल कौन थे?
उत्तर: लाला लाजपत राय
बाल गंगाधर तिलक
बिपिन चंद्र पाल
ये तीनों प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे।
9. बंगाल विभाजन का सबसे बड़ा प्रभाव क्या पड़ा?
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को नई गति मिली और यह जन आंदोलन बन गया।
10. बंगाल विभाजन कब रद्द किया गया?
उत्तर: बंगाल विभाजन 1911 में रद्द किया गया।
11. बंगाल विभाजन किसके द्वारा रद्द किया गया?
उत्तर: ब्रिटिश सम्राट King George V द्वारा।
12. बंगाल विभाजन रद्द करने की घोषणा कहाँ हुई?
उत्तर: Delhi Durbar of 1911 में।
13. बंगाल विभाजन के समय राजधानी कहाँ थी?
उत्तर: कलकत्ता (अब कोलकाता)
14. 1911 में कौन-सा महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया?
उत्तर: भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की गई।
15. बंगाल विभाजन का दीर्घकालीन प्रभाव क्या था?
उत्तर: राष्ट्रीय चेतना का विकास
स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा
कांग्रेस में गरम दल और नरम दल का उदय।
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